क्या हुआ: दिल्ली सरकार ने पिछले 15 दिनों में कृत्रिम बारिश (क्लाउड सीडिंग) के दो ट्रायल किए हैं; दिवाली और छठ के बाद हवा और बिगड़ी तो असली बारिश कराने की तैयारी है
कब: ट्रायल अक्टूबर के आखिरी और नवंबर के पहले हफ्ते में; अगला चरण दिवाली (8 नवंबर) और छठ के बाद, तारीखें अभी तय नहीं
कहां: एक ट्रायल दिल्ली एयरपोर्ट (IGI) के पास; प्रदूषण वाले दिन पूरी राजधानी के लिए योजना
आपके लिए मतलब: त्योहारों के बाद अगर AQI “गंभीर” में गया तो कुछ दिनों की राहत मिल सकती है, लेकिन जानकारों के मुताबिक यह प्रदूषण का स्थायी इलाज नहीं है
क्या करें: बारिश के भरोसे न रहें; N95 मास्क रखें, पटाखे सिर्फ तय समय पर और ग्रीन ही जलाएं, कचरा न जलाएं और शिकायत ग्रीन दिल्ली ऐप पर करें
दिवाली से तीन दिन पहले दिल्ली की हवा फिर “बहुत खराब” से “गंभीर” के बीच झूल रही है। इसी बीच दिल्ली सरकार ने एक पुराना हथियार दोबारा निकाला है, कृत्रिम बारिश। समाचार एजेंसी PTI और NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने पिछले 15 दिनों में क्लाउड सीडिंग के दो ट्रायल पूरे कर लिए हैं, और अब दिवाली व छठ के बाद ज़रूरत पड़ने पर असली ऑपरेशन की तैयारी है।
अब तक क्या हुआ
सूत्रों के हवाले से आई रिपोर्टों में बताया गया है कि एक ट्रायल दिल्ली एयरपोर्ट के पास किया गया। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार सरकार त्योहारों के बाद दो-तीन तारीखों पर बारिश कराने पर विचार कर रही है, बशर्ते उस वक्त आसमान में सही तरह के बादल और नमी मौजूद हों। सरकार की ओर से अभी कोई आधिकारिक तारीख घोषित नहीं हुई है।
क्लाउड सीडिंग में हवाई जहाज़ से बादलों में सिल्वर आयोडाइड या ड्राई आइस जैसे कण छोड़े जाते हैं। इनके चारों ओर पानी की बूंदें जमती हैं और भारी होकर बरसती हैं। बारिश हवा में तैरते महीन कणों को नीचे बैठा देती है, इसलिए कुछ घंटों से लेकर एक-दो दिन तक AQI में सुधार दिख सकता है। पिछले साल भी दिल्ली में IIT कानपुर की मदद से ऐसे ट्रायल हुए थे, लेकिन कम नमी के कारण नतीजे सीमित रहे थे।
हवा का हाल कितना बुरा
NDTV के मुताबिक गुरुवार को दिल्ली का AQI 367 के आसपास रहा, जो “बहुत खराब” श्रेणी है। उत्तरी दिल्ली का जहांगीरपुरी 459 के साथ सबसे प्रदूषित रहा, जबकि IIT दिल्ली और पंजाबी बाग 445 पर थे। सुबह नौरोजी नगर रिंग रोड पर AQI 416 दर्ज हुआ। बुधवार को शहर का औसत 377 था, जो 288 दिनों में सबसे खराब है। पूरे NCR में GRAP का दूसरा चरण लागू है।
सुप्रीम कोर्ट ने 7 और 8 नवंबर को सिर्फ ग्रीन पटाखे, सुबह 6 से 7 और रात 8 से 10 बजे के बीच जलाने की छूट दी है। 9 नवंबर से पूरी पाबंदी फिर लागू होगी। पटाखों और पराली के धुएं के बीच त्योहार के बाद के दिन सबसे मुश्किल माने जा रहे हैं।
जानकार क्या कहते हैं
Envirocatalysts के संस्थापक सुनील दहिया ने NDTV से कहा कि जब तक प्रदूषण के स्रोत पर काम नहीं होगा, क्लाउड सीडिंग लंबे समय में मदद नहीं करेगी। उनके मुताबिक दिवाली के अगले दिन जैसे बेहद खराब दिनों में इसे आज़माया जा सकता है, पर यह हल नहीं है। यानी यमुनापार से लेकर बाहरी दिल्ली तक के लोगों के लिए असली राहत गाड़ियों, धूल, कचरा जलाने और पराली पर सख्ती से ही आएगी।
दिल्ली में कृत्रिम बारिश कब होगी?
सरकार दिवाली और छठ के बाद दो-तीन तारीखों पर विचार कर रही है, लेकिन अभी कोई आधिकारिक तारीख घोषित नहीं हुई है। यह मौसम और बादलों पर भी निर्भर करेगा।
क्लाउड सीडिंग से प्रदूषण कितने दिन कम होता है?
बारिश से हवा के कण नीचे बैठते हैं, इसलिए आम तौर पर कुछ घंटों से एक-दो दिन तक राहत मिलती है। स्रोत पर नियंत्रण के बिना AQI फिर बढ़ जाता है।
दिल्ली में पटाखे कब जला सकते हैं?
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार 7 और 8 नवंबर को सुबह 6-7 और रात 8-10 बजे सिर्फ ग्रीन पटाखे।
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By SunoHub News





