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दुनिया भर की अहम ख़बरें और उनका भारत पर असर।

  • ब्राज़ील चुनाव नतीजा: पहले राउंड में पिछड़ने के बाद लूला ने पलटी बाज़ी, चौथी बार बने राष्ट्रपति; फ्लावियो बोल्सोनारो ने हार मानने से किया इनकार

    ब्राज़ील चुनाव नतीजा: पहले राउंड में पिछड़ने के बाद लूला ने पलटी बाज़ी, चौथी बार बने राष्ट्रपति; फ्लावियो बोल्सोनारो ने हार मानने से किया इनकार

    क्या हुआ: लुइज़ इनासियो लूला डा सिल्वा ने राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे दौर में फ्लावियो बोल्सोनारो को हराया
    कब: मतदान रविवार, 25 अक्टूबर 2026; नतीजा भारत में सोमवार सुबह
    कहां: ब्राज़ील
    आपके लिए मतलब: BRICS के अहम साथी ब्राज़ील में भारत से अच्छे रिश्ते रखने वाली सरकार बनी रहेगी
    क्या करें: बोल्सोनारो खेमे की कानूनी चुनौती पर नज़र रखें; नतीजे को चुनाव अदालत ने अभी पलटा नहीं है

    तीन हफ्ते पहले जिसे राजनीतिक रूप से खत्म माना जा रहा था, उसी नेता ने ब्राज़ील में इतिहास रच दिया। 80 साल के लूला डा सिल्वा ने रविवार को हुए रनऑफ में दक्षिणपंथी नेता फ्लावियो बोल्सोनारो को हरा दिया और चौथी बार राष्ट्रपति चुने गए।

    वोटों का पूरा हिसाब

    100 फीसदी वोटों की गिनती के बाद लूला को 51.79% वोट मिले, यानी करीब 6.43 करोड़। 45 साल के फ्लावियो बोल्सोनारो को 48.21% यानी करीब 5.98 करोड़ वोट मिले। द गार्डियन के मुताबिक अक्टूबर की शुरुआत में हुए पहले दौर में लूला करीब 22 लाख वोटों से पीछे थे, लेकिन दूसरे दौर में करीब 43 लाख वोटों से जीत गए। 1980 के दशक में लोकतंत्र लौटने के बाद यह पहली बार है जब पहले दौर में दूसरे नंबर पर रहा उम्मीदवार रनऑफ जीता है।

    जीत की बड़ी वजह मतदान बढ़ना मानी जा रही है। पहले दौर में रिकॉर्ड 21.08% लोग वोट डालने नहीं आए थे, जबकि दूसरे दौर में यह आंकड़ा घटकर 19.21% रहा।

    बोल्सोनारो ने नतीजा मानने से इनकार किया

    फ्लावियो बोल्सोनारो ने कहा कि नतीजा स्वीकार करना “असंभव” है और उनकी कानूनी टीम चुनाव रद्द कराने की कोशिश करेगी। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के जज क्रिस्टियानो ज़ानिन के मतदान का समय दो घंटे बढ़ाने के फैसले पर आपत्ति जताई। गार्डियन ने लिखा है कि बोल्सोनारो के अपने कैंपेन ने भी समय बढ़ाने की मांग की थी। उनके पिता, पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो, तख्तापलट की साज़िश के मामले में 27 साल की सज़ा काट रहे हैं।

    साओ पाउलो में समर्थकों को संबोधित करते हुए लूला ने कहा कि यह चुनाव “इनकार की राजनीति की हार” है और यह लोकतंत्र की जीत है। मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम और पराग्वे के राष्ट्रपति सैंटियागो पेन्या समेत कई नेताओं ने लूला को बधाई दी है।

    भारत के लिए क्यों अहम

    ब्राज़ील और भारत दोनों BRICS और G20 के सदस्य हैं। लूला के कार्यकाल में दोनों देशों के बीच व्यापार, कृषि और ऊर्जा पर सहयोग बढ़ा है। इसी हफ्ते दिल्ली में BRICS संसदीय फोरम भी हो रहा है। लूला मंगलवार को 81 साल के हो जाएंगे।

    ब्राज़ील चुनाव 2026 में किसकी जीत हुई?

    लूला डा सिल्वा ने 51.79% वोट के साथ फ्लावियो बोल्सोनारो (48.21%) को हराया।

    लूला कितनी बार राष्ट्रपति बने हैं?

    यह उनका चौथा कार्यकाल होगा। वे 2002, 2006 और 2022 में भी जीते थे।

    क्या बोल्सोनारो ने हार मान ली?

    नहीं। उन्होंने कहा है कि उनकी कानूनी टीम चुनाव रद्द कराने की कोशिश करेगी।

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  • इज़राइल चुनाव 27 अक्टूबर: आखिरी सर्वे में किसी को बहुमत नहीं, नेतन्याहू बनाम आइज़नकोट की कांटे की टक्कर

    इज़राइल चुनाव 27 अक्टूबर: आखिरी सर्वे में किसी को बहुमत नहीं, नेतन्याहू बनाम आइज़नकोट की कांटे की टक्कर

    क्या हुआ: इज़राइल में संसद (नेसेट) के आम चुनाव से पहले आखिरी सर्वे आए, किसी भी गुट को बहुमत मिलता नहीं दिख रहा
    कब: मतदान मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026; एग्ज़िट पोल भारतीय समय रात 10 बजे
    कहां: इज़राइल, 120 सीटों वाली नेसेट
    आपके लिए मतलब: इज़राइल भारत का बड़ा रक्षा और तकनीकी साझेदार है; अस्थिर नतीजे पश्चिम एशिया और तेल बाज़ार पर असर डाल सकते हैं
    क्या करें: नतीजों के बाद गठबंधन की तस्वीर साफ होने में दिन या हफ्ते लग सकते हैं, अफवाहों से बचें

    इज़राइल में मंगलवार को वोट डाले जाएंगे और मुकाबला आखिरी हफ्ते तक उलझा हुआ है। 120 सीटों वाली संसद नेसेट में सरकार बनाने के लिए 61 सीटें चाहिए। शुक्रवार को आए आखिरी सर्वे बताते हैं कि न प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू का खेमा और न ही पूर्व सेना प्रमुख गादी आइज़नकोट के नेतृत्व वाला विपक्षी गुट अपने दम पर इस आंकड़े तक पहुंच रहा है।

    दो सर्वे, दो अलग तस्वीरें

    i24NEWS के लिए डायरेक्ट पोल्स के सर्वे में नेतन्याहू के गुट को 59 सीटें मिलीं, यानी बहुमत से सिर्फ दो कम। आइज़नकोट के गुट को 47 और अरब पार्टियों को 14 सीटें दी गईं। इसमें लिकुड 26 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी रही और आइज़नकोट की यशार पार्टी 21 पर।

    सरकारी प्रसारक कान का सर्वे उलटी तस्वीर दिखाता है। उसमें नेतन्याहू खेमा 50 और आइज़नकोट का गुट 52 सीटों पर है। यशार 22 सीटों के साथ लिकुड (20) से आगे है। मारिव अखबार के सर्वे में भी विपक्ष 54 और सत्ता पक्ष 48 पर रहा, और सीधे मुकाबले में आइज़नकोट 49% के साथ नेतन्याहू (41%) से आगे दिखे।

    छोटी पार्टियां तय करेंगी खेल

    चुनाव में 3.25% वोट की न्यूनतम सीमा है। पूर्व जनरल ओफ़र विंटर की पार्टी इसी सीमा के आसपास झूल रही है। वह पार हुई या नहीं, इससे कुछ सीटों का गणित बदल सकता है। पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट की पार्टी को सर्वे में 12 से 15 सीटें मिलती दिख रही हैं।

    बहुमत न मिला तो क्या

    अगर कोई भी गुट 61 तक नहीं पहुंचा तो जोड़-तोड़ लंबी चल सकती है। इज़राइल में पिछले कुछ सालों में ऐसे हालात में बार-बार चुनाव हो चुके हैं, इसलिए नतीजों के बाद भी तस्वीर साफ होने में वक्त लग सकता है।

    भारत के लिए क्यों अहम

    इज़राइल भारत का करीबी रक्षा, कृषि और तकनीकी साझेदार है। पश्चिम एशिया में कोई भी राजनीतिक अस्थिरता कच्चे तेल की कीमतों पर असर डालती है, जो पहले से ऊंचाई पर हैं। इस बारे में हमारी रिपोर्ट ब्रेंट क्रूड $116 पर पढ़ सकते हैं।

    इज़राइल में चुनाव कब है?

    मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को; एग्ज़िट पोल भारतीय समय रात 10 बजे आएगा।

    सरकार बनाने के लिए कितनी सीटें चाहिए?

    120 सीटों वाली नेसेट में 61 सीटें।

    मुख्य मुकाबला किनके बीच है?

    प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू की लिकुड और पूर्व सेना प्रमुख गादी आइज़नकोट की यशार पार्टी के बीच।

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  • यूरोप को हथियार बेचने में भारत तीसरे नंबर पर: रक्षा सचिव बोले, गोला-बारूद की मांग से निर्यात ₹38,424 करोड़ के रिकॉर्ड पर

    यूरोप को हथियार बेचने में भारत तीसरे नंबर पर: रक्षा सचिव बोले, गोला-बारूद की मांग से निर्यात ₹38,424 करोड़ के रिकॉर्ड पर

    क्या हुआ: रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने कहा कि भारत यूरोप को हथियार निर्यात करने वाला तीसरा सबसे बड़ा देश बन गया है
    कब: शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को पत्रकारों से बातचीत में
    कितना निर्यात: भारत का रक्षा निर्यात रिकॉर्ड ₹38,424 करोड़ (करीब 3.6 अरब यूरो) पर, 80 से ज़्यादा देशों को
    आपके लिए मतलब: रक्षा उत्पादन में छोटी कंपनियों और स्टार्टअप के लिए काम और रोज़गार के मौके बढ़ रहे हैं
    आगे क्या: भारत यूरोप में जॉइंट वेंचर बनाकर वहां की सरकारी खरीद में हिस्सा लेना चाहता है

    कभी दुनिया के सबसे बड़े हथियार खरीदारों में गिना जाने वाला भारत अब यूरोप को हथियार बेचने वालों की कतार में तीसरे नंबर पर पहुंच गया है। यह बात खुद रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत में कही। डीडी न्यूज़ पर प्रकाशित आईएएनएस की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने इसका श्रेय यूरोप के “रीआर्म यूरोप” अभियान से बढ़ी मांग और देश में मज़बूत हुए रक्षा उत्पादन को दिया।

    रक्षा सचिव ने क्या कहा

    राजेश कुमार सिंह ने बताया कि भारत का रक्षा निर्यात अब तक के सबसे ऊंचे स्तर, ₹38,424 करोड़ यानी करीब 3.6 अरब यूरो पर पहुंच गया है। उन्होंने ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि पिछले एक साल में अचानक भारत यूरोप को हथियार देने वाला तीसरा सबसे बड़ा देश बन गया। उनके मुताबिक यूरोप में बड़ी मात्रा में अलग-अलग तरह का स्टैंडर्ड गोला-बारूद, तोप के गोले और छोटे-बड़े कैलिबर की गोलियां भेजी जा रही हैं।

    निर्यात सिर्फ गोला-बारूद तक सीमित नहीं है। उन्होंने हेलमेट, बुलेटप्रूफ जैकेट, छोटे हथियार और तोप प्रणालियों का भी ज़िक्र किया। दक्षिण-पूर्व एशिया के कई खरीदारों से भी अलग-अलग रक्षा उपकरणों के सौदों पर बातचीत चल रही है।

    कितना बड़ा हो गया देश का रक्षा उद्योग

    • 16 बड़ी सरकारी रक्षा कंपनियां
    • करीब 840 बड़ी और मझोली निजी कंपनियां
    • लगभग 17,000 छोटी इकाइयां और स्टार्टअप
    • घरेलू बिक्री करीब 17 अरब यूरो
    • 80 से ज़्यादा देशों को निर्यात

    रक्षा सचिव के मुताबिक सरकार हर साल के करीब 20-25 अरब डॉलर के रक्षा पूंजीगत खर्च में से 75 फीसदी देश के भीतर खर्च करने की कोशिश करती है, और भारत में डिज़ाइन व विकसित उत्पादों को प्राथमिकता दी जाती है।

    रूस पर निर्भरता घटी

    उन्होंने माना कि भारत के पास अब भी बहुत सा रूसी मूल का साजो-सामान है, लेकिन समय के साथ यह निर्भरता घटी है। उनके मुताबिक रूस के बाद फ्रांस और इज़राइल की हिस्सेदारी लगभग 15-15 फीसदी है। हाल में ग्रीस और साइप्रस की यात्रा का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भारत यूरोप में जॉइंट वेंचर बनाकर वहां की सरकारी खरीद में हिस्सा लेना चाहता है, और यूरोपीय कंपनियां भी भारत में साझेदारी कर सकती हैं।

    आम लोगों के लिए इसका मतलब यह है कि रक्षा उत्पादन अब सिर्फ बड़ी सरकारी फैक्ट्रियों तक सीमित नहीं रहा। छोटे कारखानों और तकनीकी स्टार्टअप को सप्लाई चेन में जगह मिल रही है। देश की दूसरी आर्थिक खबरें: केजी बेसिन में ऑयल इंडिया की गैस खोज और कच्चे तेल की कीमत का पेट्रोल-डीज़ल पर असर।

    यूरोप को हथियार निर्यात में भारत किस नंबर पर है?

    रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह के मुताबिक भारत अब यूरोप को हथियार निर्यात करने वाला तीसरा सबसे बड़ा देश है।

    भारत का रक्षा निर्यात कितना है?

    रक्षा सचिव के अनुसार यह रिकॉर्ड ₹38,424 करोड़ (करीब 3.6 अरब यूरो) पर है।

    भारत यूरोप को क्या-क्या बेच रहा है?

    मुख्य रूप से स्टैंडर्ड गोला-बारूद, तोप के गोले और छोटे-बड़े कैलिबर की गोलियां; इसके अलावा हेलमेट, बुलेटप्रूफ जैकेट और छोटे हथियार भी।

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  • कच्चा तेल 116 डॉलर के पार, छह महीने में सबसे महंगा; क्या भारत में बढ़ेंगे पेट्रोल-डीज़ल के दाम?

    कच्चा तेल 116 डॉलर के पार, छह महीने में सबसे महंगा; क्या भारत में बढ़ेंगे पेट्रोल-डीज़ल के दाम?

    क्या हुआ: ब्रेंट क्रूड शुक्रवार को 3.55 डॉलर उछलकर 116.72 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ, 29 अप्रैल के बाद सबसे ऊंचा स्तर
    कब: शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 (अंतरराष्ट्रीय बाज़ार)
    कहाँ: सऊदी अरब पर हूती हमलों और खाड़ी में तनाव का असर दुनिया भर के तेल बाज़ार पर
    आपके लिए क्या मतलब: दिल्ली में पेट्रोल ₹102.12 और डीज़ल ₹95.20 पर स्थिर, पर लंबे समय तक महंगे तेल से दाम और महंगाई का दबाव बढ़ सकता है
    क्या करें: अफवाह में आकर टंकी भरवाने की होड़ न करें; रोज़ सुबह तेल कंपनियों के आधिकारिक रेट देखें

    अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चा तेल फिर आग उगल रहा है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड वायदा 3.55 डॉलर यानी करीब 3.1 फीसदी चढ़कर 116.72 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। यह 29 अप्रैल के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। अमेरिकी WTI क्रूड भी 103.27 डॉलर पर पहुंच गया। पूरे हफ्ते में ब्रेंट 6 फीसदी चढ़ा।

    दाम क्यों चढ़े

    सबसे बड़ी वजह सऊदी अरब पर यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के हमले हैं, जिनमें ऊर्जा ठिकानों को भी निशाना बनाया गया। रॉयटर्स के अनुसार गुरुवार को सऊदी अरामको ने धहरान स्थित अपने मुख्यालय को खाली करने का आदेश दिया। इसी बीच संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के उम्म अल कुवैन तट के पास एक टैंकर से तेल रिसाव की खबर आई और लीबिया में एक पाइपलाइन वाल्व बंद होने से दो तेल क्षेत्रों का उत्पादन घटा। LPL फाइनेंशियल के रणनीतिकार एडम टर्नक्विस्ट ने रॉयटर्स से कहा कि सप्लाई बाधित होने का डर ही इस तेज़ी की असली वजह है।

    सऊदी अरब दुनिया का सबसे बड़ा कच्चा तेल निर्यातक है, इसलिए वहां की हर हलचल का असर सीधे कीमतों पर दिखता है। हाल में यमन से जुड़ी एक और खबर में भी इस इलाके के तनाव का असर भारतीयों पर दिखा था।

    भारत में पेट्रोल-डीज़ल का हाल

    फिलहाल पंप पर दाम नहीं बदले हैं। HDFC Sky के 23 अक्टूबर के रेट के मुताबिक दिल्ली में पेट्रोल ₹102.12 और डीज़ल ₹95.20 प्रति लीटर है। नोएडा में पेट्रोल ₹101.96 और गुरुग्राम में ₹102.97 रहा।

    भारत अपनी ज़रूरत का बड़ा हिस्सा बाहर से खरीदता है। DNA की रिपोर्ट के मुताबिक देश करीब 88 फीसदी तेल आयात करता है और चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में कच्चे तेल का आयात बिल 90.6 अरब डॉलर रहा, जो पिछले साल इसी अवधि में 61.9 अरब डॉलर था। पंप पर दाम सरकारी तेल कंपनियां तय करती हैं और वे एक हद तक बढ़ी लागत खुद झेल सकती हैं, इसलिए कच्चा तेल महंगा होते ही पेट्रोल अपने-आप महंगा नहीं होता। लेकिन यह हालत लंबी खिंची तो दाम बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

    रसोई और जेब पर असर

    महंगा तेल सिर्फ़ गाड़ी वालों की चिंता नहीं है। डीज़ल महंगा होने पर सब्ज़ी, दूध और रोज़मर्रा के सामान की ढुलाई महंगी होती है। रुपये पर दबाव बढ़ता है और महंगाई भी। घरेलू गैस उत्पादन बढ़ाने की कोशिशें, जैसे KG बेसिन में Oil India की गैस खोज, इसी वजह से अहम मानी जाती हैं।

    ब्रेंट क्रूड का ताज़ा भाव क्या है?

    रॉयटर्स के मुताबिक 23 अक्टूबर 2026 को ब्रेंट क्रूड 116.72 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ।

    दिल्ली में आज पेट्रोल-डीज़ल का रेट क्या है?

    23 अक्टूबर को दिल्ली में पेट्रोल ₹102.12 और डीज़ल ₹95.20 प्रति लीटर था; दाम में बदलाव नहीं हुआ।

    क्या पेट्रोल-डीज़ल तुरंत महंगे होंगे?

    ज़रूरी नहीं। तेल कंपनियां कुछ समय तक लागत झेल सकती हैं, लेकिन कच्चा तेल लंबे समय तक महंगा रहा तो दाम बढ़ने की आशंका है।

    यह भी पढ़ें: शाहदरा में LPG डिस्ट्रीब्यूटरों का धरना, क्या रुकेगी सिलेंडर डिलीवरी

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  • तिब्बत में 7.0 तीव्रता का भूकंप: 16 की मौत, 65 घायल; भारत और दिल्ली के लिए क्या सबक

    तिब्बत में 7.0 तीव्रता का भूकंप: 16 की मौत, 65 घायल; भारत और दिल्ली के लिए क्या सबक

    कहाँ: बाचेन (Baqen) काउंटी, नागचू, तिब्बत (चीन का शिज़ांग क्षेत्र)
    कब: 22 अक्टूबर 2026, रात 10:33 बजे (बीजिंग समय) यानी भारतीय समय के अनुसार रात क़रीब 8:03 बजे
    क्या हुआ: 7.0 तीव्रता का भूकंप; 16 लोगों की मौत, 65 घायल
    आपके लिए क्या मतलब: हिमालयी क्षेत्र भूकंप के लिहाज़ से बेहद संवेदनशील है; दिल्ली भी भूकंपीय ज़ोन-IV में आती है
    क्या करें: घर में भूकंप सुरक्षा की तैयारी रखें – “झुको, ढको, पकड़ो” का अभ्यास करें

    तिब्बत के नागचू शहर की बाचेन काउंटी में गुरुवार रात आए 7.0 तीव्रता के भूकंप में कम से कम 16 लोगों की जान चली गई और 65 लोग घायल हुए हैं। चीनी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक भूकंप का केंद्र ज़मीन से 10 किलोमीटर नीचे था। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने लापता लोगों की तलाश और घायलों के इलाज के लिए पूरी ताक़त लगाने का निर्देश दिया है।

    कहाँ और कितना नुक़सान

    चाइना अर्थक्वेक नेटवर्क्स सेंटर के अनुसार भूकंप का केंद्र मारू टाउनशिप में था, जो काउंटी मुख्यालय से लगभग 70 किलोमीटर दूर है। काउंटी मुख्यालय में बिजली गुल हो गई और संचार सेवाएँ बाधित हुईं। स्थानीय अधिकारियों ने मकान ढहने की सूचना दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक सैकड़ों मकान ढहे या क्षतिग्रस्त हुए और हज़ारों लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुँचाया गया।

    झटके तिब्बत के छामदो और न्यिंगची जैसे दूसरे हिस्सों में भी महसूस हुए। क़रीब 40 मिनट बाद पड़ोसी छिंगहाई प्रांत की ज़ादोई काउंटी में 4.3 तीव्रता का एक और झटका आया। तिब्बत प्रशासन ने लेवल-II आपातकालीन प्रतिक्रिया शुरू की है।

    ऊँचाई और ठंड से बचाव मुश्किल

    प्रभावित इलाक़ा बहुत ऊँचाई पर है, जहाँ अक्टूबर में ही रातें बेहद ठंडी होती हैं। शी जिनपिंग ने भी आफ़्टरशॉक और मौसम पर नज़र रखने तथा बेघर हुए लोगों के लिए ठहरने का इंतज़ाम करने पर ज़ोर दिया है।

    भारत के लिए यह ख़बर क्यों अहम

    यह इलाक़ा उसी हिमालयी-तिब्बती पट्टी का हिस्सा है जहाँ भारतीय और यूरेशियाई प्लेटें आपस में टकराती हैं। इसी वजह से उत्तराखंड, हिमाचल, सिक्किम, अरुणाचल और पूर्वोत्तर भूकंप के लिहाज़ से संवेदनशील हैं। दिल्ली भी भूकंपीय ज़ोन-IV में आती है, और पूर्वी दिल्ली जैसे घनी आबादी वाले इलाक़ों में पुरानी और बिना नक़्शे की बनी इमारतें जोखिम बढ़ाती हैं।

    भूकंप आए तो क्या करें

    • झुको, ढको, पकड़ो: मज़बूत मेज़ के नीचे जाएँ, सिर ढकें और झटके रुकने तक पकड़े रहें।
    • झटकों के दौरान सीढ़ियों या लिफ़्ट से भागने की कोशिश न करें; खिड़की-शीशे और भारी अलमारी से दूर रहें।
    • बाहर हों तो इमारतों, बिजली के खंभों और तारों से दूर खुले में रहें।
    • घर में टॉर्च, पानी, दवाइयाँ और ज़रूरी काग़ज़ों वाला इमरजेंसी बैग तैयार रखें।
    • भूकंप की आधिकारिक जानकारी के लिए राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) की वेबसाइट seismo.gov.in देखें।

    पुरानी इमारतों के ख़तरे पर हमारी लोकल रिपोर्ट भी पढ़ें: वेलकम में इमारत की बालकनी गिरी। दुनिया की और ख़बरें दुनिया सेक्शन में।

    तिब्बत में भूकंप कब आया?

    22 अक्टूबर 2026 को रात 10:33 बजे बीजिंग समय (भारतीय समय क़रीब 8:03 बजे) बाचेन काउंटी, नागचू में।

    भूकंप में कितने लोगों की मौत हुई?

    स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक 16 लोगों की मौत हुई और 65 घायल हुए।

    दिल्ली किस भूकंपीय ज़ोन में है?

    दिल्ली भूकंपीय ज़ोन-IV में आती है, जिसे ज़्यादा जोखिम वाला माना जाता है।

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  • यमन के पास याट पर 14 भारतीय: दूतावास जुटा रहा जानकारी, हूती दावे की पुष्टि नहीं

    यमन के पास याट पर 14 भारतीय: दूतावास जुटा रहा जानकारी, हूती दावे की पुष्टि नहीं

    कहाँ: यमन के तट के पास, लाल सागर
    कब: 22 अक्टूबर 2026
    क्या हुआ: एक याट से जुड़ी घटना में 14 भारतीय नागरिकों के सवार होने की ख़बर; भारतीय दूतावास तथ्य जुटा रहा है
    आपके लिए क्या मतलब: खाड़ी और लाल सागर क्षेत्र में काम करने वाले भारतीय नाविकों और उनके परिवारों के लिए सतर्क रहने का समय
    क्या करें: सिर्फ़ आधिकारिक अपडेट पर भरोसा करें; विदेश में फँसे परिजन की मदद के लिए विदेश मंत्रालय के MADAD पोर्टल पर अनुरोध दर्ज करें

    यमन के तट के पास 22 अक्टूबर को एक याट से जुड़ी घटना में 14 भारतीय नागरिकों के सवार होने की ख़बर के बाद भारत सरकार हरकत में है। यमन में भारतीय दूतावास ने कहा है कि वह घटना की जानकारी जुटा रहा है और भारतीयों की सुरक्षा के लिए हर संभव मदद देगा।

    दूतावास ने क्या कहा

    दूतावास ने 22 अक्टूबर की शाम X पर बताया कि उसने याट पर 14 भारतीयों से जुड़ी घटना की रिपोर्ट देखी है और विवरण की पुष्टि की जा रही है। इसके कुछ घंटे बाद एक और पोस्ट में दूतावास ने कहा कि वहाँ जारी संघर्ष की वजह से सटीक जानकारी फ़िलहाल उपलब्ध नहीं है और कोशिशें जारी हैं।

    https://x.com/IndiaInYemen/status/2113264112666919152

    हूती पक्ष का दावा, पुष्टि बाकी

    PTI के हवाले से छपी रिपोर्ट के मुताबिक यमन के हूती गुट के प्रवक्ता याह्या सरी ने दावा किया कि लाल सागर में युक़र द्वीप के पास सऊदी बलों ने इस याट को निशाना बनाया। इस दावे की किसी स्वतंत्र स्रोत या भारत सरकार ने अब तक पुष्टि नहीं की है। याट पर सवार भारतीयों की मौजूदा स्थिति के बारे में भी आधिकारिक जानकारी नहीं आई है।

    खाड़ी में बढ़ता तनाव

    यह घटना ऐसे समय हुई है जब क्षेत्र में तनाव बढ़ा हुआ है। इसी हफ़्ते 21 अक्टूबर को सऊदी अरब के दम्माम में हवाई अड्डे और एक तेल क्षेत्र पर हुए हमलों में एक भारतीय की मौत हुई थी और तीन अन्य घायल हुए थे। खाड़ी देशों में लाखों भारतीय काम करते हैं, और लाल सागर दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री रास्तों में है, जहाँ बड़ी संख्या में भारतीय नाविक जहाज़ों पर तैनात रहते हैं।

    परिवार और नाविक क्या करें

    • आधिकारिक स्रोत: भारतीय दूतावास (यमन) के X हैंडल @IndiaInYemen और विदेश मंत्रालय के बयानों पर नज़र रखें। सोशल मीडिया पर नाम या तस्वीरों वाली अपुष्ट सूचियाँ आगे न बढ़ाएँ।
    • MADAD पोर्टल: विदेश में फँसे या लापता परिजन के लिए विदेश मंत्रालय के madad.gov.in पर शिकायत दर्ज की जा सकती है।
    • कंपनी से संपर्क: नाविकों के परिजन शिपिंग कंपनी या भर्ती एजेंसी (RPSL) से लिखित जानकारी माँगें।
    • यात्रा से पहले: संघर्ष वाले क्षेत्रों की यात्रा से पहले विदेश मंत्रालय की ताज़ा ट्रैवल एडवाइज़री ज़रूर देखें।

    दुनिया की और ख़बरें दुनिया सेक्शन में और देश की ख़बरें देश सेक्शन में पढ़ें। यह भी पढ़ें: तिब्बत में 7.0 तीव्रता का भूकंप।

    यमन के पास याट पर कितने भारतीय थे?

    भारतीय दूतावास के मुताबिक रिपोर्ट्स में 14 भारतीय नागरिकों के याट पर होने की बात कही गई है; दूतावास विवरण की पुष्टि कर रहा है।

    क्या याट पर हमले की पुष्टि हुई है?

    हूती प्रवक्ता ने सऊदी बलों पर निशाना बनाने का दावा किया है, लेकिन इसकी स्वतंत्र या भारत सरकार की ओर से पुष्टि नहीं हुई है।

    विदेश में फँसे परिजन के लिए मदद कहाँ माँगें?

    विदेश मंत्रालय के MADAD पोर्टल (madad.gov.in) पर अनुरोध दर्ज करें और संबंधित दूतावास के आधिकारिक हैंडल देखें।

    स्रोत