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क्राइम स्टोरी: सौम्या विश्वनाथन हत्याकांड, नेल्सन मंडेला मार्ग की वो रात और 15 साल बाद आया फैसला

सुनोहब डेस्क

भारत के सर्वोच्च न्यायालय की इमारत

क्या हुआ: टीवी पत्रकार सौम्या विश्वनाथन (25) की दक्षिण दिल्ली के नेल्सन मंडेला मार्ग पर काम से घर लौटते वक्त गोली मारकर हत्या कर दी गई थी; 15 साल बाद चार लोगों को उम्रकैद हुई
कब: वारदात 30 सितंबर 2008; गिरफ्तारी मार्च 2009; सज़ा 25 नवंबर 2023; हाईकोर्ट से सज़ा निलंबित 12 फरवरी 2024
कहां: नेल्सन मंडेला मार्ग, वसंत कुंज इलाका, दक्षिण दिल्ली; मुकदमा साकेत कोर्ट में चला
आपके लिए मतलब: यह केस दिखाता है कि एक “ब्लाइंड” यानी बिना सुराग वाली हत्या भी दूसरे केस की पूछताछ से सुलझ सकती है, लेकिन अदालती लड़ाई कितनी लंबी होती है
क्या करें: देर रात अकेले ड्राइव करें तो किसी अपने को लाइव लोकेशन भेजें, संदिग्ध गाड़ी पीछा करे तो भीड़ वाली जगह या थाने की तरफ मुड़ें और तुरंत 112 डायल करें

30 सितंबर 2008 की देर रात। एक अंग्रेज़ी न्यूज़ चैनल में काम करने वाली 25 साल की पत्रकार सौम्या विश्वनाथन दफ्तर से अपनी कार में घर लौट रही थीं। दक्षिण दिल्ली के नेल्सन मंडेला मार्ग पर उन्हें गोली मार दी गई। कोई चश्मदीद नहीं, कोई सीधा सुराग नहीं। पुलिस की फाइलों में यह एक “ब्लाइंड मर्डर” था। इस केस को सुलझने में छह महीने और अदालत से फैसला आने में पूरे 15 साल लगे। और आज, 2026 में भी, यह मामला पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

टाइमलाइन: एक नज़र में

  • 30 सितंबर 2008: नेल्सन मंडेला मार्ग पर सौम्या विश्वनाथन की गोली मारकर हत्या।
  • जनवरी 2009: पुलिस के मुताबिक इसी गिरोह ने लूट के बाद एक टैक्सी ड्राइवर की हत्या की।
  • 23 मार्च 2009: IT एग्ज़ीक्यूटिव जिगिशा घोष की हत्या के मामले में रवि कपूर, अमित शुक्ला और बलजीत मलिक गिरफ्तार; पूछताछ में सौम्या केस का खुलासा।
  • 2011: आरोपियों पर महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून (MCOCA) लगाया गया।
  • अक्टूबर 2023: साकेत कोर्ट ने चार आरोपियों को हत्या और MCOCA के तहत दोषी ठहराया।
  • 25 नवंबर 2023: चारों को उम्रकैद, पांचवें दोषी को तीन साल की सज़ा।
  • 12 फरवरी 2024: दिल्ली हाईकोर्ट ने अपील लंबित रहने तक चारों की सज़ा निलंबित कर ज़मानत दी।
  • बाद में: सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश में दखल देने से इनकार किया।

जिगिशा घोष केस से खुला राज़

सौम्या की हत्या के बाद कई महीनों तक पुलिस के हाथ खाली रहे। मोड़ मार्च 2009 में आया। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक 23 मार्च 2009 को पुलिस ने रवि कपूर, अमित शुक्ला और बलजीत मलिक को एक और लूट-हत्या के मामले में गिरफ्तार किया। यह मामला IT एग्ज़ीक्यूटिव जिगिशा घोष का था, जिन्हें वसंत विहार से अगवा किया गया था और उनका शव हरियाणा के सूरजकुंड के पास मिला था।

पूछताछ के दौरान इन तीनों ने कथित तौर पर कबूल किया कि सौम्या की हत्या में भी उनका हाथ था। एक पुलिस अधिकारी ने तब इंडियन एक्सप्रेस को बताया था, “उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने एक और साथी अजय कुमार के साथ मिलकर उसे गोली मारी थी। उन्होंने यह भी बताया कि जनवरी 2009 में उन्होंने एक टैक्सी ड्राइवर को लूटकर उसकी हत्या की थी।” बाद में अजय सेठी नाम के एक और व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया।

जांच: MCOCA क्यों लगा और क्यों उलझा केस

2011 में दिल्ली पुलिस ने आरोपियों पर MCOCA की धाराएं जोड़ीं। दिल्ली में यह कानून महाराष्ट्र से लागू किया गया है। पुलिस का तर्क था कि यह एक संगठित गिरोह है जो लगातार लूट और हत्या कर रहा था। इस कानून से यह सुनिश्चित हुआ कि आरोपी ज़मानत पर बाहर आकर अलग-अलग मामलों के गवाहों को धमका या प्रभावित न कर सकें।

लेकिन इसी फैसले ने केस को लंबा भी कर दिया। अब अभियोजन को सिर्फ हत्या ही नहीं, यह भी साबित करना था कि आरोपी एक संगठित अपराध गिरोह का हिस्सा हैं। सालों तक गवाहियां और बहस चलती रहीं। सौम्या का परिवार, खासकर उनकी मां माधवी विश्वनाथन, हर तारीख पर इंसाफ का इंतज़ार करता रहा।

कोर्ट का फैसला: 15 साल बाद उम्रकैद

अक्टूबर 2023 में साकेत कोर्ट के एडिशनल सेशंस जज रवींद्र कुमार पांडे ने रवि कपूर, अमित शुक्ला, बलजीत मलिक और अजय कुमार को हत्या (IPC धारा 302) और MCOCA की धारा 3(1)(i), यानी संगठित अपराध से किसी की मौत, के तहत दोषी ठहराया। अजय सेठी को चोरी का माल लेने (IPC 411) और संगठित अपराध में मदद की साज़िश का दोषी माना गया।

25 नवंबर 2023 को सज़ा सुनाई गई। द हिंदू के मुताबिक चारों को दो-दो उम्रकैद दी गईं और अदालत ने साफ किया कि ये सज़ाएं एक के बाद एक (consecutively) चलेंगी। इंडिया टुडे के अनुसार चारों पर IPC के तहत 25-25 हज़ार और MCOCA के तहत एक-एक लाख रुपये जुर्माना लगा। अजय सेठी को तीन साल की सज़ा और 7.5 लाख रुपये जुर्माना हुआ, लेकिन वह 14 साल से ज़्यादा जेल में रह चुका था, इसलिए सज़ा उसी में समायोजित कर दी गई।

अभियोजन ने मौत की सज़ा मांगी थी, लेकिन अदालत ने कहा कि यह मामला “दुर्लभ में दुर्लभतम” श्रेणी में नहीं आता।

हाईकोर्ट से ज़मानत और सुप्रीम कोर्ट

सज़ा के तीन महीने बाद, 12 फरवरी 2024 को दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस गिरीश कठपालिया की बेंच ने चारों दोषियों की सज़ा उनकी अपील के फैसले तक निलंबित कर दी। अदालत में बताया गया कि वे करीब 14 साल 9 महीने जेल में रह चुके हैं। अपील पर सुनवाई “नियत समय पर” होनी थी। दोषियों के वकील ने तब यह भी कहा था कि तीन दोषी जिगिशा घोष केस में भी उम्रकैद काट रहे हैं।

सौम्या की मां माधवी ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, और दिल्ली पुलिस ने भी अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया, लेकिन TV9 भारतवर्ष की रिपोर्ट के मुताबिक बाद में उसने हाईकोर्ट के फैसले में दखल देने से इनकार कर दिया और परिवार की याचिका खारिज कर दी। दोषियों की सज़ा के खिलाफ मुख्य अपील दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित है, यानी कानूनी तौर पर यह केस अभी अंतिम मुकाम तक नहीं पहुंचा है।

इस केस से क्या सबक

1. देर रात सफर में सुरक्षा

सौम्या देर रात अकेले लौट रही थीं। रात की शिफ्ट में काम करने वाले लोग, खासकर मीडिया, IT और अस्पतालों के कर्मचारी, अपनी लाइव लोकेशन परिवार या दोस्त से शेयर करें। कोई गाड़ी पीछा करती लगे तो सुनसान रास्ते की बजाय पेट्रोल पंप, थाने या भीड़ वाली जगह की तरफ जाएं और 112 पर कॉल करें।

2. एक केस की जांच दूसरे को खोल सकती है

यह मामला बताता है कि अपराधी अक्सर एक ही ढर्रे पर कई वारदातें करते हैं। जिगिशा घोष केस की जांच ही सौम्या केस की कुंजी बनी। इसलिए किसी भी छोटी लूट या संदिग्ध घटना की शिकायत ज़रूर दर्ज कराएं; हो सकता है वही कड़ी किसी बड़े केस तक ले जाए।

3. न्याय में देरी

वारदात से फैसले तक 15 साल और उसके बाद भी अपील लंबित। यह केस भारतीय अदालतों में लंबित मामलों की समस्या की याद दिलाता है, जिसकी कीमत पीड़ित परिवारों को चुकानी पड़ती है।

सौम्या विश्वनाथन की हत्या कब और कहां हुई थी?

30 सितंबर 2008 की रात दक्षिण दिल्ली के नेल्सन मंडेला मार्ग पर, जब वह काम से घर लौट रही थीं।

सौम्या विश्वनाथन केस में किसे सज़ा हुई?

रवि कपूर, अमित शुक्ला, बलजीत मलिक और अजय कुमार को 25 नवंबर 2023 को उम्रकैद हुई; अजय सेठी को तीन साल की सज़ा मिली।

क्या दोषी अभी जेल में हैं?

दिल्ली हाईकोर्ट ने 12 फरवरी 2024 को अपील लंबित रहने तक चारों की सज़ा निलंबित कर ज़मानत दी थी; सुप्रीम कोर्ट ने इसमें दखल से इनकार किया। तीन दोषी जिगिशा घोष केस में भी उम्रकैद पा चुके हैं।

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स्रोत

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