क्या हुआ: पूर्वी दिल्ली के गांधी नगर में कपड़ा और आर्टिफिशियल ज्वेलरी की फैक्ट्रियों से 19 बच्चों को बाल मज़दूरी से छुड़ाया गया; नौ फैक्ट्री मालिक पकड़े गए और नौ यूनिट सील की गईं
कब: कार्रवाई की जानकारी 30 अक्टूबर 2026 को सामने आई
कहां: गांधी नगर, पूर्वी दिल्ली; FIR गांधी नगर थाने में दर्ज
आपके लिए मतलब: बच्चों से काम करवाना गंभीर अपराध है; आसपास ऐसा दिखे तो चुप न रहें
क्या करें: बाल मज़दूरी की सूचना चाइल्डलाइन 1098 या पुलिस हेल्पलाइन 112 पर दें; आपकी पहचान गोपनीय रखी जा सकती है
दस साल का एक बच्चा, जिसे फैक्ट्री में काम के बदले रोज़ के सिर्फ 10 रुपये मिलते थे और जिनसे वह खाने की जगह टॉफी-नमकीन खरीद लेता था। गांधी नगर की फैक्ट्रियों से छुड़ाए गए 19 बच्चों की कहानी कुछ ऐसी ही है। समाचार एजेंसी PTI और द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्वी दिल्ली के गांधी नगर इलाके में कपड़ा और आर्टिफिशियल ज्वेलरी की यूनिटों पर छापे में ये बच्चे मिले। नौ फैक्ट्री मालिकों को पकड़ा गया और नौ फैक्ट्रियां सील कर दी गईं।
उत्तर प्रदेश और बिहार से लाए गए थे बच्चे
छुड़ाए गए बच्चों की उम्र 10 से 17 साल के बीच है। इनमें पांच बच्चे 14 साल से कम उम्र के हैं और एक लड़की भी है। पुलिस के मुताबिक बच्चों को उत्तर प्रदेश और बिहार से दिल्ली लाया गया था और वे करीब आठ महीने से इन यूनिटों में काम कर रहे थे।
एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि 19 में से 15 बच्चे सिलाई और कढ़ाई की यूनिटों में लगे थे, जबकि चार आर्टिफिशियल ज्वेलरी की पैकिंग करते थे।
सुबह 7 से रात 8 बजे तक काम, फैक्ट्री में ही सोना
पूछताछ में सामने आया कि दो बच्चे रोज़ सुबह 7 बजे से रात 8 बजे तक काम करते थे, रात को फैक्ट्री में ही सो जाते थे और अगली सुबह फिर मशीन पर बैठ जाते थे। बच्चों को हफ्ते के 20 से 200 रुपये तक दिए जाते थे। सबसे छोटे, 10 साल के बच्चे को रोज़ 10 रुपये मिलते थे।
किसने की कार्रवाई
FIR के मुताबिक छापे एक संयुक्त टीम ने मारे, जिसमें SDM, तहसीलदार, श्रम विभाग, दिल्ली पुलिस और गैर-सरकारी संगठन एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन (AVA), बेसिक फाउंडेशन और बाल विकास धारा शामिल थे।
AVA के राष्ट्रीय समन्वयक धनंजय टिंगल ने कहा कि बच्चों को घर से दूर ले जाकर उनका बचपन छीन लिया गया; जिस उम्र में हाथ में किताबें और खिलौने होने चाहिए थे, उस उम्र में वे सुई-धागे और मशीनों के साथ काम कर रहे थे।
सभी बच्चों का मेडिकल करवाया गया और चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के निर्देश पर उन्हें बाल गृह भेजा गया है। फैक्ट्री मालिकों के खिलाफ गांधी नगर थाने में जुवेनाइल जस्टिस एक्ट 2015, बाल श्रम (प्रतिषेध और विनियमन) अधिनियम 1986 और भारतीय न्याय संहिता की धाराओं में FIR दर्ज हुई है और जांच जारी है।
यमुनापार के लिए सबक
गांधी नगर, सीलमपुर, जाफराबाद और आसपास के इलाकों में गलियों के अंदर सैकड़ों छोटी सिलाई और पैकिंग यूनिटें चलती हैं। ऐसी जगहों पर बाहर से लाए गए कम उम्र के बच्चे दिखें, देर रात तक काम चलता मिले या बच्चे वहीं रहते हों, तो यह खतरे का संकेत है। कानून के मुताबिक 14 साल से कम उम्र के बच्चे से किसी भी तरह का काम करवाना अपराध है, और 14 से 18 साल के किशोरों से खतरनाक काम नहीं करवाया जा सकता।
गांधी नगर में कितने बच्चों को बाल मज़दूरी से छुड़ाया गया?
19 बच्चों को, जिनकी उम्र 10 से 17 साल है। नौ फैक्ट्री मालिक पकड़े गए और नौ यूनिट सील हुईं।
छुड़ाए गए बच्चों का अब क्या होगा?
मेडिकल जांच के बाद चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के निर्देश पर उन्हें बाल गृह भेजा गया है।
बाल मज़दूरी की शिकायत कहां करें?
चाइल्डलाइन 1098 या पुलिस हेल्पलाइन 112 पर, या नज़दीकी थाने में।


