क्या हुआ: मंगोलपुरी इंडस्ट्रियल एरिया फेज़-1 की एक जूता फैक्ट्री में शुक्रवार रात आग लगी; अंदर बेहोश मिले छह लोगों में से चार की मौत हो गई, दो का इलाज चल रहा है
कब: शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026, रात करीब 9:30 बजे
कहां: मंगोलपुरी इंडस्ट्रियल एरिया फेज़-1, उत्तर-पश्चिम दिल्ली
आपके लिए मतलब: दिल्ली के घने औद्योगिक इलाकों में छोटी फैक्ट्रियों की फायर सेफ्टी फिर सवालों में है; ऐसी यूनिटों में काम करने वाले मज़दूरों के लिए खतरा असली है
क्या करें: जहां काम करते हैं वहां निकलने के दो रास्ते, चालू फायर एक्सटिंग्विशर और खुली सीढ़ियां देखें; आग दिखे तो तुरंत 101 या 112 पर कॉल करें
उत्तर-पश्चिम दिल्ली के मंगोलपुरी इंडस्ट्रियल एरिया में शुक्रवार रात एक जूता बनाने वाली फैक्ट्री में लगी आग ने चार लोगों की जान ले ली। दो लोग अस्पताल में भर्ती हैं। पुलिस और दिल्ली फायर सर्विस (DFS) के अधिकारियों के हवाले से समाचार एजेंसी PTI और द हिंदू ने बताया कि आग फेज़-1 की एक यूनिट में रात करीब साढ़े नौ बजे लगी।
सूचना मिलते ही फायर सर्विस ने करीब 20 दमकल गाड़ियां मौके पर भेजीं। आग बुझाने और अंदर तलाशी के दौरान छह लोग बेहोशी की हालत में मिले। उन्हें संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने चार को मृत घोषित कर दिया। बाकी दो का इलाज जारी है।
पुलिस ने क्या कहा
पुलिस के एक अधिकारी ने बताया, “आगे की तलाशी और बचाव का काम जारी है। उचित कानूनी कार्रवाई की जा रही है।” आग किस वजह से लगी, यह अभी साफ नहीं है। मरने वालों की पहचान और फैक्ट्री मालिक के बारे में शुरुआती रिपोर्टों में आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है। जांच पूरी होने पर ही पता चलेगा कि फैक्ट्री के पास फायर NOC थी या नहीं और अंदर सुरक्षा के इंतज़ाम कैसे थे।
जूता फैक्ट्रियों में आग क्यों ज़्यादा खतरनाक
जूते बनाने में रबर, फोम, रेक्सीन, गोंद और केमिकल सॉल्वेंट का इस्तेमाल होता है। ये चीज़ें जल्दी आग पकड़ती हैं और जलते वक्त बहुत घना, ज़हरीला धुआं छोड़ती हैं। कई बार लोग लपटों से पहले धुएं से बेहोश हो जाते हैं। मंगोलपुरी में भी पीड़ित बेहोशी की हालत में मिले, जो इसी खतरे की तरफ इशारा करता है।
दिल्ली के औद्योगिक इलाकों की पुरानी समस्या
मंगोलपुरी, बवाना, नरेला, मुंडका से लेकर यमुनापार के गांधी नगर और शाहदरा तक, दिल्ली में हज़ारों छोटी यूनिटें तंग इमारतों में चलती हैं। कई जगह एक ही सीढ़ी होती है, खिड़कियों पर जाली लगी होती है और माल गलियारों में भरा रहता है। ऐसे में आग लगे तो बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। मज़दूर अक्सर रात की शिफ्ट में भी अंदर रहते हैं।
अगर आप फैक्ट्री या वर्कशॉप में काम करते हैं
अपनी यूनिट में यह ज़रूर देखें कि बाहर निकलने का दूसरा रास्ता है या नहीं, फायर एक्सटिंग्विशर भरे हुए हैं या नहीं और सीढ़ियों पर सामान तो नहीं रखा। धुआं भरे कमरे में झुककर, नाक-मुंह गीले कपड़े से ढककर निकलें। आग दिखते ही फायर सर्विस के 101 या आपात नंबर 112 पर कॉल करें, पहले खुद बुझाने की कोशिश में समय न गंवाएं।
मंगोलपुरी फैक्ट्री आग में कितने लोगों की मौत हुई?
पुलिस के मुताबिक छह लोग बेहोश मिले थे, जिनमें से चार को अस्पताल में मृत घोषित किया गया और दो का इलाज चल रहा है।
आग कब और कहां लगी?
शुक्रवार 30 अक्टूबर 2026 की रात करीब 9:30 बजे, मंगोलपुरी इंडस्ट्रियल एरिया फेज़-1 की एक जूता फैक्ट्री में।
आग लगने की वजह क्या थी?
अभी वजह साफ नहीं है; पुलिस जांच कर रही है और कानूनी कार्रवाई की बात कही गई है।
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