क्या हुआ: शाहदरा थाने में वकीलों से झड़प के बाद ACP और SHO के तबादले के विरोध में सोमवार को सैकड़ों पुलिसकर्मी पुलिस मुख्यालय के बाहर धरने पर बैठे; शाम को अफसरों के आश्वासन के बाद धरना खत्म हुआ
कब: सोमवार, 2 नवंबर 2026 सुबह करीब 8 बजे से शाम तक; उपराज्यपाल की पुलिसकर्मियों से बातचीत मंगलवार 3 नवंबर शाम 4 बजे
कहां: दिल्ली पुलिस मुख्यालय, जय सिंह मार्ग; विवाद की जड़ शाहदरा थाना (यमुनापार)
आपके लिए मतलब: पुलिस कमिश्नर ने पुलिस और वकीलों के बीच तालमेल के लिए संयुक्त कमेटी और नोडल अफसर बनाने की बात कही है; शाहदरा कोर्ट और थाने से जुड़े कामकाज पर फिलहाल असर नहीं
क्या करें: कोर्ट या थाने के किसी काम के लिए जाना हो तो पहले फोन से स्थिति पता कर लें; किसी अफवाह वाले वॉट्सऐप मैसेज को आगे न बढ़ाएं
दिल्ली पुलिस के इतिहास में ऐसी तस्वीर कम ही दिखती है। सोमवार सुबह करीब 8 बजे जय सिंह मार्ग पर पुलिस मुख्यालय के बाहर वर्दी पहने पुलिसकर्मी हाथों में तख्तियां लेकर सड़क किनारे बैठ गए। इनमें महिला अफसर भी थीं। मांग एक ही थी, शाहदरा के दो अफसरों का तबादला वापस हो।
द हिंदू के मुताबिक शुरुआत में करीब 100 पुलिसकर्मी पहुंचे, जबकि अमर उजाला ने दिन चढ़ने के साथ यह संख्या करीब 500 बताई। दिलचस्प बात यह है कि मुख्यालय और आसपास के इलाके में धारा 163 लागू है, यानी चार से ज़्यादा लोगों के जमा होने पर रोक है। शाम को वरिष्ठ अफसरों के कहने पर धरना खत्म हुआ और लोग लौट गए।
विवाद शुरू कहां से हुआ
मामला 23 अक्टूबर का है। शाहदरा थाने में वकीलों और पुलिसकर्मियों के बीच हाथापाई हुई, जिसमें अधिवक्ता ललित बंसल के सिर में गंभीर चोट आई। इसके बाद दिल्ली की ज़िला अदालतों के वकील अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए। 28 अक्टूबर को गांधी नगर सब-डिवीज़न के ACP मनस्वी वशिष्ठ को SPUWAC और शाहदरा SHO इंस्पेक्टर अरुण कुमार को सिक्योरिटी यूनिट भेज दिया गया। तबादले के बाद वकीलों ने हड़ताल वापस ले ली।
पुलिस का पक्ष अलग है। NDTV इंडिया से बातचीत में ACP वशिष्ठ ने कहा कि पहले दिन कुछ लोगों ने एक व्यक्ति से मारपीट की थी और अगले दिन SHO को धमकी दी गई, हेड कांस्टेबल को बैठा लिया गया और थाने में बदसलूकी हुई। उनके मुताबिक इस पर FIR भी दर्ज है। उन्होंने कहा कि तबादले से उन्हें दुख हुआ है।
पुलिसकर्मियों की मांगें
- पुलिस से बदसलूकी करने वाले अधिवक्ता की गिरफ्तारी।
- SHO के कमरे में एक साथ पांच से ज़्यादा अधिवक्ताओं को आने की इजाज़त न हो।
- कचहरी जाने वाले पुलिसकर्मियों को पूरी सुरक्षा मिले।
- वकीलों और पुलिस के बीच बातचीत की SOP बने और दोनों अफसरों की पुरानी तैनाती बहाल हो।
आज उपराज्यपाल से मुलाकात
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू मंगलवार शाम 4 बजे किंग्सवे कैंप के उत्सव सदन में कांस्टेबल से इंस्पेक्टर रैंक तक के पुलिसकर्मियों से बात करेंगे। सर्कुलर में हर ज़िले और ट्रैफिक यूनिट से 20-20 कर्मियों को भेजने को कहा गया है। उधर हिंदुस्तान टाइम्स ने दिल्ली पुलिस प्रवक्ता राजीव रंजन के हवाले से बताया कि वकीलों और पुलिस की एक संयुक्त कमेटी बनेगी और ज़िला स्तर पर नोडल अफसर तैनात होंगे, ताकि ऐसे झगड़े दोबारा न भड़कें।
यमुनापार के लोगों के लिए यह मामला इसलिए अहम है क्योंकि कड़कड़डूमा कोर्ट और शाहदरा थाना रोज़ हज़ारों लोगों के कामकाज से जुड़े हैं। पिछले महीने की हड़ताल में कई तारीखें आगे खिसक गई थीं। अब सबकी नज़र मंगलवार की बैठक पर है।
दिल्ली पुलिस के जवानों ने प्रदर्शन क्यों किया?
शाहदरा थाने में 23 अक्टूबर की झड़प के बाद ACP मनस्वी वशिष्ठ और SHO अरुण कुमार के तबादले के विरोध में और अपनी सुरक्षा की मांग को लेकर।
क्या धरना अब भी जारी है?
नहीं, सोमवार शाम वरिष्ठ अफसरों के कहने पर धरना खत्म हो गया। मंगलवार शाम 4 बजे उपराज्यपाल पुलिसकर्मियों से बात करेंगे।
वकील-पुलिस विवाद रोकने के लिए क्या होगा?
पुलिस प्रवक्ता के मुताबिक एक संयुक्त कमेटी बनेगी और ज़िला स्तर व मुख्यालय पर नोडल अफसर नियुक्त होंगे।





