क्या हुआ: दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने गांधी नगर ट्रैफिक सर्कल की सड़कों पर खुदाई, अधूरे काम और मलबे से लग रहे जाम पर पूर्वी ज़िले के DM को चिट्ठी लिखकर तुरंत दखल मांगा है
कब: 15 अक्टूबर को मौके का निरीक्षण हुआ, चिट्ठी करीब दो हफ्ते पहले भेजी गई; खबर 30 अक्टूबर 2026 को सामने आई
कहां: गीता कॉलोनी का राजा राम कोहली मार्ग और ब्लॉक 1-A, स्वामी दयानंद मार्ग, झील खुरेजा, कांति नगर साउथ और आसपास की गलियां
आपके लिए मतलब: इन रास्तों पर रोज़ जाम, उड़ती धूल और फिसलन वाली सड़क से दोपहिया और पैदल चलने वालों को सबसे ज़्यादा खतरा है
क्या करें: इन सड़कों से गुज़रें तो समय लेकर निकलें, बच्चों और बुज़ुर्गों के साथ सावधानी रखें; मलबे या टूटी सड़क की शिकायत MCD की 311 ऐप पर फोटो के साथ दर्ज कर सकते हैं
गांधी नगर बाज़ार, गीता कॉलोनी या झील खुरेजा की तरफ से रोज़ निकलने वाले लोग जिस जाम को अपनी किस्मत मान चुके हैं, उसकी वजहें अब ट्रैफिक पुलिस ने खुद कागज़ पर लिख दी हैं। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक गांधी नगर ट्रैफिक सर्कल के ट्रैफिक इंस्पेक्टर ने पूर्वी ज़िला प्रशासन यानी DM को चिट्ठी भेजकर कहा है कि खोदी गई सड़कें, अधूरे सिविल काम, बिल्डिंग मलबे के ढेर और टूटी सतह यहां जाम, धूल और हादसों की बड़ी वजह बन गए हैं।
चिट्ठी में अलग-अलग एजेंसियों के बीच तालमेल बिठाकर मलबा हटाने, खुदी सड़कें ठीक करवाने, धूल रोकने और सड़क सुरक्षा के इंतज़ाम करने की मांग की गई है। पुलिस का कहना है कि 15 अक्टूबर को फील्ड इंस्पेक्शन किया गया और हर समस्या वाली जगह की GPS लोकेशन वाली तस्वीरें भी ली गईं।
किन सड़कों पर सबसे बुरा हाल
राजा राम कोहली मार्ग, गीता कॉलोनी
यहां सड़क किनारे खुदाई की मिट्टी, ईंटें, टूटा कंक्रीट और मलबा जमा मिला। कंक्रीट के स्लैब और निर्माण सामग्री सड़क के चलने लायक हिस्से तक फैली है, जिससे दोनों तरफ के ट्रैफिक के लिए रास्ता संकरा हो गया है। पुलिस ने लिखा है कि पैदल चलने वाले, साइकिल सवार और ई-रिक्शा मजबूरी में गाड़ियों के साथ उसी तंग हिस्से में चल रहे हैं, जिससे हादसे का खतरा बढ़ता है।
स्वामी दयानंद मार्ग और झील खुरेजा
इन हिस्सों में खुदाई अधूरी छोड़ दी गई, सड़क की मरम्मत पूरी नहीं हुई और ढीली मिट्टी व रोड़ी सड़क पर बिखरी पड़ी है। ऊबड़-खाबड़ सतह पर दोपहिया वाहनों के फिसलने का डर सबसे ज़्यादा बताया गया है।
गीता कॉलोनी ब्लॉक 1-A और कांति नगर साउथ
यहां मलबे के अलावा सड़क पर खड़ी निजी और कमर्शियल गाड़ियां भी रास्ता घेर रही हैं। खुली मिट्टी और निर्माण कचरा गाड़ियों के गुज़रते ही धूल बनकर उड़ता है।
एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड की चिंता
चिट्ठी का सबसे गंभीर हिस्सा यह है कि संकरी हो चुकी सड़कों पर एंबुलेंस और दमकल की गाड़ियों के फंसने का खतरा है। फुटपाथ और सड़क के किनारे घिरे होने से लोग सड़क के बीच में चलने को मजबूर हैं। यानी मामला सिर्फ देरी का नहीं, सुरक्षा का भी है।
यमुनापार के लिए इसका मतलब
गांधी नगर एशिया के बड़े कपड़ा बाज़ारों में गिना जाता है और त्योहारी सीज़न में यहां भीड़ कई गुना बढ़ जाती है। दिवाली 8 नवंबर को है, इसलिए अगले दस दिन यही सड़कें सबसे ज़्यादा भरी रहेंगी। अगर मलबा और अधूरा काम समय पर नहीं हटा, तो शाहदरा, कृष्णा नगर और लक्ष्मी नगर की तरफ जाने वाला ट्रैफिक भी इसकी चपेट में आएगा। हाल की बारिश के बाद खुली मिट्टी कीचड़ में बदल चुकी है, जो फिसलन और बढ़ाती है।
अब नज़र इस पर है कि ज़िला प्रशासन MCD, PWD और जल बोर्ड जैसी एजेंसियों के साथ मिलकर कितनी जल्दी काम पूरा करवाता है। रिपोर्ट में अभी किसी एजेंसी की तरफ से तय समय-सीमा का ज़िक्र नहीं है।
गांधी नगर और गीता कॉलोनी में जाम की वजह क्या है?
ट्रैफिक पुलिस की चिट्ठी के मुताबिक खोदी गई सड़कें, अधूरे सिविल काम, मलबे के ढेर, टूटी सतह और सड़क पर खड़ी गाड़ियां।
ट्रैफिक पुलिस ने किससे कार्रवाई मांगी है?
पूर्वी ज़िले के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (DM) से, ताकि सभी एजेंसियां मिलकर मलबा हटाएं और सड़कें ठीक करें।
टूटी सड़क या मलबे की शिकायत कहां करें?
MCD की 311 ऐप पर फोटो और लोकेशन के साथ शिकायत दर्ज की जा सकती है।
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