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पूर्वी दिल्ली निर्माण पाबंदी: लक्ष्मी नगर-गीता कॉलोनी में जॉइंट टीमों की जांच, ईस्ट जिले में ₹6 लाख के चालान

सुनोहब डेस्क

हरी जाली और नीली टीन से ढकी रुकी हुई निर्माण साइट, धुंधला आसमान (AI से बनी प्रतीकात्मक तस्वीर)

क्या हुआ: GRAP और विंटर एक्शन प्लान के तहत जॉइंट टीमें लक्ष्मी नगर, गीता कॉलोनी, गांधी नगर में निर्माण स्थलों की जांच कर रही हैं
कब: 5 नवंबर तक के आंकड़े; CAQM की 15 दिन की पाबंदी 5 नवंबर से, दिल्ली सरकार की पाबंदी 1 नवंबर से 31 जनवरी तक
कहां: पूर्वी जिला—विश्वास नगर, गांधी नगर, पटपड़गंज सब-डिवीजन; प्रीत विहार
आपके लिए मतलब: घर या दुकान पर बाहर का निर्माण, तोड़फोड़ या मलबा फेंकना अभी चालान की वजह बन सकता है
क्या करें: काम रोकें, सामान हरी जाली से ढकें, मलबा नाली/सड़क पर न डालें; उल्लंघन दिखे तो ग्रीन दिल्ली ऐप पर शिकायत करें

लक्ष्मी नगर की एक निर्माणाधीन बिल्डिंग के गेट पर हाथ से लिखा बोर्ड टंगा है—“काम बंद है”। अंदर सीमेंट की बोरियां हरी जाली से ढकी हैं और मजदूर गायब। Indian Express की ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक पूर्वी दिल्ली में प्रदूषण रोकने के लिए बनी जॉइंट टीमें इन दिनों ऐसी ही साइटों पर पहुंच रही हैं। टीम में MCD, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) और सिविल डिफेंस के कर्मचारी शामिल हैं।

पूर्वी जिले में ₹6 लाख के चालान

रिपोर्ट के अनुसार पूर्वी जिले के तीन सब-डिवीजन—विश्वास नगर, गांधी नगर और पटपड़गंज—में 5 नवंबर तक निर्माण-तोड़फोड़ पाबंदी तोड़ने पर करीब 6 लाख रुपये के चालान कटे। इनमें पटपड़गंज की दो सरकारी निर्माण साइटें भी शामिल हैं। पूरी दिल्ली में पांच दिन में 1.5 करोड़ रुपये से ज्यादा के जुर्माने लगे, जिनमें बिना PUC गाड़ी चलाने के चालान भी जुड़े हैं। एक टीम ने प्रीत विहार में नाली में निर्माण मलबा डालने पर 20 हजार रुपये का चालान किया और एक साइट पर लकड़ी जलाने पर कोर्ट चालान काटा।

कौन-सी पाबंदी, कब तक

दिल्ली सरकार का विंटर एक्शन प्लान 1 नवंबर से लागू है, जिसमें 31 जनवरी तक बाहर का निर्माण और धूल उड़ाने वाली तोड़फोड़ मना है। जरूरी सार्वजनिक परियोजनाओं को छूट है। इसके ऊपर CAQM ने 5 नवंबर से 15 दिन के लिए पूरे एनसीआर में ऐसे काम पर रोक लगाई और शुक्रवार से GRAP-3 भी लागू हो गया। DPCC के एक जूनियर इंजीनियर ने अखबार को बताया कि टीमें सरकारी ऐप पर आई शिकायतों और वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर साइटें चुनती हैं। MCD अधिकारी के मुताबिक इलाके में ज्यादातर साइटें 500 वर्ग मीटर से छोटी हैं; शुरू में कई लोग नियम तोड़ रहे थे, पर अब हालात सुधरे हैं।

मजदूरों पर असर

पाबंदी का दूसरा पहलू दिहाड़ी मजदूर हैं। लक्ष्मी नगर साइट के गार्ड ने बताया कि 1 नवंबर से काम बंद है और “सब लेबर चली गई”। जिन परिवारों का घर अधूरा पड़ा है, उनके लिए भी इंतजार लंबा हो सकता है। अगर आप मरम्मत करा रहे हैं तो अंदर का छोटा काम भी धूल नियंत्रण के साथ ही करें—सामान ढककर रखें और मलबा तय जगह पर ही डलवाएं।

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स्रोत

By SunoHub News

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