क्या हुआ: रेलवे बोर्ड ने सभी ज़ोन को निर्देश दिया है कि ट्रेन के कोच में मोबाइल-लैपटॉप चार्जिंग पॉइंट रात 11 से सुबह 5 बजे तक हर हाल में बंद रहें
कब: बोर्ड का पत्र 26 अक्टूबर 2026 का; सख्ती अभी से
कहां: देशभर की ट्रेनें, खासकर AC कोच
आपके लिए मतलब: रात के सफर में फोन रात 11 बजे से पहले चार्ज कर लेना होगा
क्या करें: सफर से पहले फोन और पावर बैंक पूरा चार्ज रखें; सस्ते या फूले हुए पावर बैंक साथ न रखें
रात की ट्रेन में सोते वक्त फोन चार्जिंग पर लगाकर छोड़ देने की आदत अब नहीं चलेगी। रेलवे बोर्ड ने सभी ज़ोनल रेलवे को सख्त निर्देश दिए हैं कि कोच के मोबाइल और लैपटॉप चार्जिंग पॉइंट रात 11 बजे से सुबह 5 बजे तक बंद ही रहें, और इसमें कोई छूट नहीं होगी।
क्यों आया यह आदेश
New Indian Express और PTI के मुताबिक बोर्ड ने 26 अक्टूबर के पत्र में बताया कि दक्षिण पूर्व रेलवे की एक ट्रेन में ऑनबोर्ड स्टाफ ने तय समय पर चार्जिंग पॉइंट बंद नहीं किए थे। इसी दौरान चार्ज हो रहा एक यात्री का पावर बैंक फट गया और कोच में धुआं भर गया। इसके बाद बोर्ड ने स्टाफ को ट्रेनिंग देने और अफसरों-सुपरवाइज़रों के स्तर पर अचानक जांच करने को भी कहा है।
नियम नया नहीं, पुराना है
यह पाबंदी जून 2014 से है। 2013 में हज़ूर साहिब नांदेड़-बेंगलुरु एक्सप्रेस के AC थ्री-टियर कोच में आग के बाद रेलवे सुरक्षा आयुक्त ने रात में चार्जिंग बंद रखने की सिफारिश की थी। तब बोर्ड ने AC कोचों के लिए रात 11 से सुबह 5 बजे का समय तय किया। नवंबर 2023 में नई दिल्ली-दरभंगा हमसफर क्लोन स्पेशल के स्लीपर कोच में आग के बाद स्लीपर कोच में भी यह नियम लागू करने की सिफारिश हुई, लेकिन बोर्ड ने कहा था कि गैर-AC कोच में इसके लिए स्टाफ लगाना बहुत खर्चीला है।
यात्री क्या करें
- रात का सफर है तो स्टेशन पहुंचने से पहले फोन और पावर बैंक पूरा चार्ज कर लें।
- ब्रांडेड और अच्छी हालत वाला पावर बैंक ही रखें; फूला या गर्म होने वाला पावर बैंक खतरनाक है।
- चार्जिंग पर लगा फोन बिना देखे न छोड़ें, इससे चोरी का खतरा भी रहता है।
आनंद विहार और पुरानी दिल्ली से बिहार, यूपी जाने वाली रात की ट्रेनों में सफर करने वाले यमुनापार के लाखों यात्रियों पर इसका सीधा असर पड़ेगा।
ट्रेन में चार्जिंग पॉइंट कब बंद रहेंगे?
रात 11 बजे से सुबह 5 बजे तक।
यह आदेश क्यों दिया गया?
दक्षिण पूर्व रेलवे की एक ट्रेन में चार्ज होते वक्त पावर बैंक फटने के बाद, आग से बचाव के लिए।
क्या यह नियम नया है?
नहीं, AC कोच के लिए यह नियम 2014 से है। अब इसे सख्ती से लागू करने को कहा गया है।

