क्या हुआ: MCD स्थायी समिति ने मच्छर-रोधी काम के लिए 1,066 खाली पदों पर कॉन्ट्रैक्ट भर्ती, 923.6 करोड़ रुपये में 70 मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनें और बैरियर-फ्री टोल प्रस्ताव को मंज़ूरी दी
कब: शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 की बैठक
कहां: MCD के सभी 250 वार्ड; टोल सिस्टम गाज़ीपुर समेत दिल्ली के एंट्री पॉइंट पर
आपके लिए मतलब: डेंगू-मलेरिया जांच के लिए ज़्यादा फील्ड स्टाफ, सड़कों पर कम धूल और बॉर्डर टोल पर कमर्शियल गाड़ियों का कम जाम
क्या करें: घर-छत पर पानी जमा न होने दें, मच्छर ब्रीडिंग या टूटी सड़क की शिकायत MCD 311 ऐप पर करें
डेंगू के मौसम में गली-मोहल्लों में मच्छर जांच करने वाले कर्मचारी कम पड़ रहे थे। अब दिल्ली नगर निगम (MCD) ने इस कमी को भरने का रास्ता खोला है। शुक्रवार को MCD की स्थायी समिति ने जन स्वास्थ्य विभाग के 1,066 खाली पदों पर कॉन्ट्रैक्ट पर भर्ती को मंज़ूरी दी। इसी बैठक में सड़कों की धूल कम करने के लिए 923.6 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट और बॉर्डर पर बिना रुके टोल वसूली का प्रस्ताव भी पास हुआ।
मच्छरों से लड़ने के लिए 1,066 पद
टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक खाली पदों में 14 एंटी-मलेरिया ऑफिसर, 105 मलेरिया इंस्पेक्टर, 398 असिस्टेंट मलेरिया इंस्पेक्टर और 549 मल्टी-टास्किंग स्टाफ (MTS) शामिल हैं। यही लोग घर-घर जाकर लार्वा जांचते हैं, ब्रीडिंग खत्म कराते हैं, फॉगिंग करते हैं और जागरूकता अभियान चलाते हैं।
स्थायी समिति की अध्यक्ष सत्या शर्मा ने कहा कि यह विभाग संक्रामक और मच्छर से फैलने वाली बीमारियों की रोकथाम और निगरानी में अहम भूमिका निभाता है, इसलिए नियमित फील्ड जांच, लार्वा टेस्टिंग और जागरूकता ज़रूरी है।
70 मशीनें करेंगी सड़कों की सफाई
923.6 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट में 70 मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनें अगले 10 साल तक MCD की सड़कों पर चलेंगी। काम तीन पैकेज में बंटा है:
- पहला पैकेज: 29 मशीनें, 369.5 करोड़ रुपये (एजेंसी को काम दिया जा चुका)
- दूसरा पैकेज: 28 मशीनें, 368.8 करोड़ रुपये
- तीसरा पैकेज: 13 मशीनें, 185.2 करोड़ रुपये
छोटी मशीनें बिजली से चलेंगी, बड़ी मशीनों में बिजली या CNG का विकल्प होगा। PTI के मुताबिक ये मशीनें नवंबर के पहले हफ्ते में आनी थीं, पर इनमें देरी हुई है।
बॉर्डर पर बिना रुके टोल
गाज़ीपुर भी लिस्ट में
PTI के अनुसार समिति ने दिल्ली के 126 एंट्री पॉइंट पर बैरियर-फ्री टोल वसूली का प्रस्ताव मंज़ूर किया। इकनॉमिक टाइम्स और TOI के मुताबिक पहले चरण में 20 बड़े पॉइंट पर मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) सिस्टम लग रहा है, जिनसे शहर में आने वाला करीब 85% ट्रैफिक गुज़रता है। इनमें गाज़ीपुर, राजोकरी, बदरपुर, द्वारका और आया नगर शामिल हैं।
इस सिस्टम में RFID टैग और नंबर प्लेट पढ़ने वाले ANPR कैमरों से टोल टैक्स और पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क (ECC) अपने आप कटेगा। बिना भुगतान निकलने वाली गाड़ियों को डिजिटल नोटिस जाएगा। ओवरहेड गैंट्री लग चुकी हैं और अगले हफ्ते ट्रायल की योजना है। एक वरिष्ठ MCD अधिकारी ने TOI से कहा कि NHAI से अनुमति 15 सितंबर को ही मिली थी।
हर वार्ड में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग
सत्या शर्मा ने अफसरों को हर वार्ड के कम से कम एक पार्क में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग बनाने को कहा। बैठक में अलग-अलग एजेंसियों द्वारा बिना अनुमति और तालमेल के सड़कें खोदने पर भी चिंता जताई गई, जो यमुनापार के गांधी नगर-गीता कॉलोनी जैसे इलाकों में जाम की बड़ी वजह बनी हुई है। गाज़ीपुर बॉर्डर पर रोज़ जाम झेलने वाले पूर्वी दिल्ली के लोगों के लिए टोल सिस्टम कितना काम करता है, यह ट्रायल के बाद ही साफ होगा।
MCD कितने पदों पर भर्ती करेगी?
जन स्वास्थ्य विभाग के 1,066 खाली पदों पर कॉन्ट्रैक्ट भर्ती, जिनमें 549 MTS और 398 असिस्टेंट मलेरिया इंस्पेक्टर हैं।
रोड स्वीपिंग मशीनों पर कितना खर्च होगा?
10 साल के लिए 70 मशीनों पर करीब 923.6 करोड़ रुपये।
बैरियर-फ्री टोल कहां लगेगा?
पहले चरण में गाज़ीपुर, बदरपुर, राजोकरी, द्वारका, आया नगर समेत 20 बड़े एंट्री पॉइंट पर।
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