क्या हुआ: दिल्ली सरकार की दवा और मेडिकल उपकरण खरीद में करीब 842 करोड़ रुपये के कथित घोटाले में एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) की चार्जशीट पर राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने संज्ञान ले लिया है
कब: चार्जशीट 16 सितंबर को दाखिल; कोर्ट के संज्ञान की खबर 29 अक्टूबर को सामने आई
कहां: राउज़ एवेन्यू कोर्ट, नई दिल्ली; मामला दिल्ली सरकार की सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी (CPA) और DGHS से जुड़ा
आपके लिए मतलब: सरकारी अस्पतालों के लिए दवा, X-रे मशीन और दूसरे सामान की खरीद में जनता के पैसे के कथित नुकसान का मुकदमा अब आगे बढ़ेगा
क्या करें: अदालत की अगली कार्यवाही पर नज़र रखें; किसी सरकारी खरीद में गड़बड़ी दिखे तो विजिलेंस विभाग में शिकायत की जा सकती है
दिल्ली के सरकारी अस्पतालों के लिए दवाइयां और मशीनें खरीदने वाली एजेंसी में कथित घोटाले का केस अब मुकदमे के अगले चरण में पहुंच गया है। राउज़ एवेन्यू कोर्ट के स्पेशल जज विद्या प्रकाश ने एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) की चार्जशीट पर संज्ञान ले लिया है। ACB ने इस मामले में सरकारी खज़ाने को करीब 842 करोड़ रुपये का नुकसान होने का आरोप लगाया है।
दो मशीन का टेंडर, ऑर्डर 448 का
इंडियन एक्सप्रेस ने चार्जशीट के हवाले से बताया है कि मामले के केंद्र में सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी (CPA) है, जो दिल्ली सरकार के अस्पतालों को दवाइयां, वैक्सीन और उपकरण सप्लाई करती है। ACB के मुताबिक सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) पोर्टल पर सिर्फ दो X-रे मशीनों की बोली डाली गई, ताकि कम कंपनियां दिलचस्पी लें, जबकि ऑर्डर 448 मशीनों का दिया गया।
चार्जशीट का आरोप है कि जो X-रे मशीन निर्माता कंपनी दूसरे विभागों को करीब 14.9 लाख रुपये (टैक्स समेत) में बेचती थी, वही CPA को लगभग 37.8 लाख रुपये प्रति मशीन में बेची गई। ACB का यह भी कहना है कि चहेती फर्मों के बिल एक-दो दिन में पास हो जाते थे, जबकि दूसरे सप्लायर दो साल तक भुगतान का इंतज़ार करते रहे।
चादर से ORS तक, आरोपों की लंबी सूची
- चादर और लिनन के करीब 25 करोड़ रुपये के सामान के लिए 75 करोड़ रुपये का भुगतान।
- 50 लाख ORS पैकेट, जिनकी कीमत करीब 1.25 करोड़ रुपये थी, उनके लिए 7.5 करोड़ रुपये।
- 20-25 करोड़ रुपये के सर्जिकल सामान के लिए करीब 100 करोड़ रुपये।
- खरीद से जुड़ी 10 अहम फाइलें गायब।
अदालत में ACB की ओर से सीनियर पब्लिक प्रॉसिक्यूटर कुमार संजय ने कहा कि गायब फाइलों में यह ब्योरा था कि मांग किसने भेजी, टेंडर की शर्तें किसने बनाईं और तकनीकी-वित्तीय जांच किसने की। उनके न मिलने से जांच एजेंसी को बुनियादी दस्तावेज़ों से वंचित होना पड़ा।
किन पर हैं आरोप
चार्जशीट में CPA के हेड ऑफ ऑफिस रहे डॉ. विनोद कुमार रंगा, स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) की प्रमुख रहीं डॉ. वत्सला अग्रवाल, CPA के पूर्व डिप्टी कंट्रोलर ऑफ अकाउंट्स नीरज चोपड़ा और दवा कारोबारी राजीव रंगीला की दो कंपनियों के नाम हैं। ACB ने रंगीला को कथित घोटाले का एक मास्टरमाइंड बताया है। ETV भारत के मुताबिक आरोप भ्रष्टाचार निरोधक कानून और भारतीय न्याय संहिता की धाराओं में लगाए गए हैं। ये सभी आरोप हैं, जिन पर फैसला अदालत में सुनवाई के बाद होगा।
मामला मई में तब खुला जब शिकायतों के बाद विजिलेंस विभाग ने CPA के दफ्तरों पर छापे मारे। 2 जून को FIR दर्ज हुई और 18 जून को डॉ. रंगा की गिरफ्तारी हुई। चार्जशीट में 84 गवाह और 123 दस्तावेज़ हैं।
आम मरीज़ के लिए क्यों अहम
सरकारी अस्पतालों में दवा और जांच मशीनों के लिए जो पैसा जाता है, वह सीधे जनता का है। ज़्यादा दाम पर खरीद का मतलब है कि उतने ही बजट में कम मशीनें और कम दवाइयां। गुरु तेग बहादुर, लोक नायक या स्वामी दयानंद जैसे सरकारी अस्पतालों पर निर्भर यमुनापार के लाखों मरीज़ों के लिए खरीद में पारदर्शिता का सवाल इसलिए अहम है।
दिल्ली मेडिकल खरीद घोटाला कितने करोड़ का है?
ACB ने चार्जशीट में सरकारी खज़ाने को करीब 842 करोड़ रुपये के नुकसान का आरोप लगाया है।
किस कोर्ट ने चार्जशीट पर संज्ञान लिया?
राउज़ एवेन्यू कोर्ट के स्पेशल जज विद्या प्रकाश ने।
X-रे मशीन को लेकर क्या आरोप है?
ACB के मुताबिक जो मशीन दूसरे विभागों को करीब 14.9 लाख में बिकी, वह CPA को करीब 37.8 लाख रुपये प्रति मशीन में बेची गई और 2 की बोली पर 448 मशीनों का ऑर्डर दिया गया।
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