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    गामड़ी गांव की 36 अवैध फैक्ट्रियों पर NGT सख्त: बंद ताले खोलकर होगी जांच, अवैध मिलीं तो कटेगी बिजली

    क्या हुआ: नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने पूर्वी दिल्ली के गामड़ी गांव में चल रहीं 36 कथित अवैध औद्योगिक इकाइयों की नए सिरे से संयुक्त जांच का आदेश दिया है; ताले लगे परिसरों को भी कानून के मुताबिक खोलकर जांचा जाएगा
    कब: आदेश 14 अक्टूबर 2026 का, खबर 26-27 अक्टूबर को सामने आई; अगली सुनवाई 3 फरवरी 2027
    कहां: गामड़ी गांव, यमुना विहार सब-डिवीजन (उत्तर-पूर्वी दिल्ली)
    आपके लिए मतलब: रिहायशी इलाके में इलेक्ट्रोप्लेटिंग, पिकलिंग, डाइंग जैसी प्रदूषण फैलाने वाली यूनिटें पकड़ी गईं तो उनकी बिजली तुरंत काटी जाएगी; आसपास रहने वालों को ज़हरीले धुएं और गंदे पानी से राहत मिल सकती है
    क्या करें: अपने इलाके में अवैध प्रदूषणकारी यूनिट दिखे तो DPCC या MCD में लिखित शिकायत करें और फोटो, लोकेशन साथ दें

    भजनपुरा और यमुना विहार के बीच बसे गामड़ी गांव की तंग गलियों में चल रही छोटी-छोटी फैक्ट्रियों पर अब फिर से जांच टीम पहुंचेगी। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने 36 कथित अवैध औद्योगिक इकाइयों की दोबारा संयुक्त जांच करने को कहा है। खास बात यह है कि पिछली बार जिन परिसरों पर ताला लटका मिला था, उन्हें भी इस बार देखा जाएगा।

    पिछली जांच में ताले क्यों बने रुकावट

    NGT चेयरपर्सन जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज़ अहमद की प्रधान पीठ एक याचिका पर सुनवाई कर रही है। याचिका में आरोप है कि इन यूनिटों में मेटल सरफेस ट्रीटमेंट, पिकलिंग, निकल इलेक्ट्रोप्लेटिंग, पाउडर कोटिंग, कांच पिघलाने, गैल्वनाइज़िंग और कपड़ा रंगाई जैसे काम चल रहे हैं, जिनसे हवा और पानी दोनों में प्रदूषण फैलता है।

    DPCC, CPCB, MCD, BSES और दिल्ली पुलिस के अधिकारी पहले भी यहां जांच कर चुके हैं। लेकिन कई परिसर बंद मिले, इसलिए यह पता ही नहीं चल सका कि अंदर क्या काम हो रहा है। ट्रिब्यूनल ने साफ किया कि दिल्ली नगर निगम अधिनियम, 1957 की धारा 431 और 433 के तहत MCD के अधिकृत अधिकारी परिसर में घुसकर जांच कर सकते हैं और तय प्रक्रिया के तहत ताला भी खुलवा सकते हैं।

    इस बार टीम में कौन-कौन रहेगा

    MCD ने ट्रिब्यूनल से कहा कि अगर उसे बॉडी कैमरा लगे पुलिसकर्मियों की पर्याप्त सुरक्षा मिले तो वह कार्रवाई करेगा। पुलिस की तरफ से इस पर कोई आपत्ति नहीं जताई गई। आदेश के मुताबिक:

    • 8 नवंबर 2024 को बनी संयुक्त समिति ही दोबारा जांच करेगी।
    • यमुना विहार के SDM जांच के दौरान मौके पर मौजूद रहेंगे।
    • BSES यमुना पावर लिमिटेड के CEO का प्रतिनिधि भी समिति में जोड़ा गया है। कोई यूनिट अवैध चलती मिली तो BSES उसका बिजली कनेक्शन तुरंत काटेगी।
    • उत्तर-पूर्वी ज़िले के डीएम समिति के कामकाज का समन्वय करते रहेंगे।

    याचिकाकर्ता से इलाके की बाकी कथित अवैध यूनिटों की लोकेशन (जियो-कोऑर्डिनेट) देने को भी कहा गया है, ताकि उनकी जांच भी हो सके। समिति को अपनी रिपोर्ट अगली सुनवाई से कम से कम एक हफ्ता पहले जमा करनी है।

    आसपास के लोगों के लिए क्यों अहम

    उत्तर-पूर्वी दिल्ली के कई गांवों और कॉलोनियों में घरों के बीच ही ऐसी यूनिटें चलती हैं। इलेक्ट्रोप्लेटिंग और पिकलिंग में तेज़ाब और भारी धातुओं वाले रसायन इस्तेमाल होते हैं, जो नालियों के रास्ते आगे यमुना तक पहुंचते हैं। सर्दियों में जब हवा पहले से भारी रहती है, तब इन भट्ठियों और कोटिंग यूनिटों का धुआं मुश्किल और बढ़ाता है। बिजली काटने की शर्त इस आदेश को पिछली जांचों से ज़्यादा असरदार बना सकती है, क्योंकि बिना बिजली के ये यूनिटें चल ही नहीं पाएंगी।

    अब नज़र इस पर रहेगी कि टीम कब मौके पर पहुंचती है और 3 फरवरी 2027 की सुनवाई से पहले कितनी यूनिटों पर कार्रवाई होती है।

    NGT ने गामड़ी गांव को लेकर क्या आदेश दिया है?

    36 कथित अवैध औद्योगिक इकाइयों की दोबारा संयुक्त जांच का, जिसमें पहले बंद मिले परिसर भी कानूनी प्रक्रिया से खोलकर जांचे जाएंगे।

    अवैध यूनिट मिली तो क्या होगा?

    BSES यमुना पावर लिमिटेड को उसका बिजली कनेक्शन तुरंत काटने का निर्देश है।

    मामले की अगली सुनवाई कब है?

    3 फरवरी 2027 को; समिति को उससे कम से कम एक हफ्ता पहले रिपोर्ट देनी है।

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    स्रोत