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  • चुनाव आयोग वोटर सूची दूसरा मौका: दिल्ली समेत 7 राज्यों में ASDD-छूटे मतदाताओं के लिए खिड़की

    चुनाव आयोग वोटर सूची दूसरा मौका: दिल्ली समेत 7 राज्यों में ASDD-छूटे मतदाताओं के लिए खिड़की

    क्या हुआ: चुनाव आयोग ने दिल्ली समेत 7 राज्य/केंद्रशासित में ASDD (Absent/Shifted/Dead/Duplicate) चिह्नित वोटर्स को दूसरा मौका दिया
    कब: SC टिप्पणी ~28 अक्टूबर 2026 के बाद ECI निर्देश; नवंबर 2026 में CEOs को पत्र
    कहां: दिल्ली, महाराष्ट्र, हरियाणा, आंध्र प्रदेश, झारखंड, तेलंगाना, नागालैंड
    आपके लिए मतलब: ड्राफ्ट रोल से छूटे वोटर सरल बयान/एन्यूमरेशन से नाम वापस ला सकते हैं; मूल EPIC बना रह सकता है
    क्या करें: ब्लॉक लेवल अफसर/CEO वेबसाइट पर ASDD सूची देखें; शिफ्ट-इन-स्टेट वाले बयान दें; बेघर वोटर बूथ अधिकारी सत्यापन

    चुनाव आयोग ने उन मतदाताओं के लिए राहत खिड़की खोली है जिनका नाम ड्राफ्ट वोटर सूची में Absent, Shifted, Dead या Duplicate (ASDD) अंकित होने के कारण छूट गया था और जिनके फॉर्म वापस नहीं आए थे। Indian Express, NDTV, Hindustan Times और Times of India के अनुसार दिल्ली हाईकोर्ट/सुप्रीम कोर्ट की करीब 28 अक्टूबर 2026 की टिप्पणी के बाद ECI ने दिल्ली, महाराष्ट्र, हरियाणा, आंध्र प्रदेश, झारखंड, तेलंगाना और नागालैंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिए कि ASDD सूचियां दोबारा प्रदर्शित की जाएं और सरलीकृत बयान/एन्यूमरेशन स्वीकार किया जाए।

    राज्य के भीतर शिफ्ट हुए वोटर फॉर्म-8 की जटिल प्रक्रिया के बिना बयान देकर अपना दावा रख सकते हैं। बेघर मतदाताओं के लिए बूथ अधिकारी सत्यापन का प्रावधान बताया गया। जिनके नाम स्वीकार होते हैं, उनका मूल EPIC बना रह सकता है—यानी नई पहचान कार्ड की बाध्यता हर केस में नहीं। दिल्ली में SIR/ड्राफ्ट रोल विवाद के बीच यह कदम उन नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण है जो किराये के मकान बदलते रहते हैं या गणना के समय घर पर नहीं मिले।

    क्या चेक करें

    CEO दिल्ली या अपने राज्य की वेबसाइट पर ASDD/left-out सूची देखें। नाम मिलने पर निर्धारित तिथि से पहले बयान/फॉर्म जमा करें—ऑनलाइन ECINET या भौतिक केंद्र, जो सुविधा खुली हो। Dead/Duplicate गलत चिह्नित होने पर दस्तावेज (पता प्रमाण, जीवित होने का प्रमाण) तैयार रखें। शिफ्ट-आउट राज्य वाले अलग प्रक्रिया समझें; यह राहत मुख्यतः सूचीबद्ध सात इकाइयों और शिफ्ट-इन-स्टेट केस पर केंद्रित है।

    मतदान अधिकार का मतलब

    वोटर सूची से नाम कटना चुपचाप अधिकार छीन सकता है। दूसरा मौका प्रशासनिक सुधार है, जादू नहीं—समय सीमा चूकने पर फिर लंबी आपत्ति प्रक्रिया लग सकती है। परिवार के बुजुर्गों और किरायेदारों के नाम अभी चेक कर लें; दिवाली भीड़ में दस्तावेज जमा करना टालना जोखिम भरा है।

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    स्रोत

    By SunoHub News