क्या हुआ: ब्रेंट क्रूड शुक्रवार को 3.55 डॉलर उछलकर 116.72 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ, 29 अप्रैल के बाद सबसे ऊंचा स्तर
कब: शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 (अंतरराष्ट्रीय बाज़ार)
कहाँ: सऊदी अरब पर हूती हमलों और खाड़ी में तनाव का असर दुनिया भर के तेल बाज़ार पर
आपके लिए क्या मतलब: दिल्ली में पेट्रोल ₹102.12 और डीज़ल ₹95.20 पर स्थिर, पर लंबे समय तक महंगे तेल से दाम और महंगाई का दबाव बढ़ सकता है
क्या करें: अफवाह में आकर टंकी भरवाने की होड़ न करें; रोज़ सुबह तेल कंपनियों के आधिकारिक रेट देखें
अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चा तेल फिर आग उगल रहा है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड वायदा 3.55 डॉलर यानी करीब 3.1 फीसदी चढ़कर 116.72 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। यह 29 अप्रैल के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। अमेरिकी WTI क्रूड भी 103.27 डॉलर पर पहुंच गया। पूरे हफ्ते में ब्रेंट 6 फीसदी चढ़ा।
दाम क्यों चढ़े
सबसे बड़ी वजह सऊदी अरब पर यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के हमले हैं, जिनमें ऊर्जा ठिकानों को भी निशाना बनाया गया। रॉयटर्स के अनुसार गुरुवार को सऊदी अरामको ने धहरान स्थित अपने मुख्यालय को खाली करने का आदेश दिया। इसी बीच संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के उम्म अल कुवैन तट के पास एक टैंकर से तेल रिसाव की खबर आई और लीबिया में एक पाइपलाइन वाल्व बंद होने से दो तेल क्षेत्रों का उत्पादन घटा। LPL फाइनेंशियल के रणनीतिकार एडम टर्नक्विस्ट ने रॉयटर्स से कहा कि सप्लाई बाधित होने का डर ही इस तेज़ी की असली वजह है।
सऊदी अरब दुनिया का सबसे बड़ा कच्चा तेल निर्यातक है, इसलिए वहां की हर हलचल का असर सीधे कीमतों पर दिखता है। हाल में यमन से जुड़ी एक और खबर में भी इस इलाके के तनाव का असर भारतीयों पर दिखा था।
भारत में पेट्रोल-डीज़ल का हाल
फिलहाल पंप पर दाम नहीं बदले हैं। HDFC Sky के 23 अक्टूबर के रेट के मुताबिक दिल्ली में पेट्रोल ₹102.12 और डीज़ल ₹95.20 प्रति लीटर है। नोएडा में पेट्रोल ₹101.96 और गुरुग्राम में ₹102.97 रहा।
भारत अपनी ज़रूरत का बड़ा हिस्सा बाहर से खरीदता है। DNA की रिपोर्ट के मुताबिक देश करीब 88 फीसदी तेल आयात करता है और चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में कच्चे तेल का आयात बिल 90.6 अरब डॉलर रहा, जो पिछले साल इसी अवधि में 61.9 अरब डॉलर था। पंप पर दाम सरकारी तेल कंपनियां तय करती हैं और वे एक हद तक बढ़ी लागत खुद झेल सकती हैं, इसलिए कच्चा तेल महंगा होते ही पेट्रोल अपने-आप महंगा नहीं होता। लेकिन यह हालत लंबी खिंची तो दाम बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
रसोई और जेब पर असर
महंगा तेल सिर्फ़ गाड़ी वालों की चिंता नहीं है। डीज़ल महंगा होने पर सब्ज़ी, दूध और रोज़मर्रा के सामान की ढुलाई महंगी होती है। रुपये पर दबाव बढ़ता है और महंगाई भी। घरेलू गैस उत्पादन बढ़ाने की कोशिशें, जैसे KG बेसिन में Oil India की गैस खोज, इसी वजह से अहम मानी जाती हैं।
ब्रेंट क्रूड का ताज़ा भाव क्या है?
रॉयटर्स के मुताबिक 23 अक्टूबर 2026 को ब्रेंट क्रूड 116.72 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ।
दिल्ली में आज पेट्रोल-डीज़ल का रेट क्या है?
23 अक्टूबर को दिल्ली में पेट्रोल ₹102.12 और डीज़ल ₹95.20 प्रति लीटर था; दाम में बदलाव नहीं हुआ।
क्या पेट्रोल-डीज़ल तुरंत महंगे होंगे?
ज़रूरी नहीं। तेल कंपनियां कुछ समय तक लागत झेल सकती हैं, लेकिन कच्चा तेल लंबे समय तक महंगा रहा तो दाम बढ़ने की आशंका है।
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