क्या हुआ: महादेव ऑनलाइन बुक नाम के अवैध सट्टेबाज़ी सिंडिकेट के प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को CBI ओमान से प्रत्यर्पित कर भारत ले आई है
कब: भारत लाया गया: रविवार, 1 नवंबर 2026 की शाम; रायपुर की विशेष CBI अदालत में पेशी: सोमवार, 2 नवंबर
कहां: ओमान (मस्कट) से भारत; केस छत्तीसगढ़ के रायपुर में
आपके लिए मतलब: जांच एजेंसियों के मुताबिक यह देश के सबसे बड़े अवैध ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क में से एक था; अब मनी ट्रेल और मदद करने वालों पर और खुलासे हो सकते हैं
क्या करें: किसी भी सट्टेबाज़ी ऐप या “पक्की कमाई” वाले लिंक से दूर रहें; अपना बैंक खाता किसी को इस्तेमाल के लिए न दें, यह अपराध है; ठगी हो तो 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत करें
करीब तीन साल की तलाश के बाद महादेव ऑनलाइन सट्टेबाज़ी केस का मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर भारत पहुंच गया है। CBI के प्रवक्ता ने रविवार को बताया कि एजेंसी ने दूसरी केंद्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर उसे ओमान से प्रत्यर्पित कराया है। ओमान भेजी गई CBI की विशेष टीम उसे लेकर रविवार शाम भारत लौटी।
आज रायपुर में पेशी
CBI के बयान के मुताबिक चंद्राकर की पहले मेडिकल जांच होगी, फिर ट्रांज़िट रिमांड लेकर उसे रायपुर ले जाया जाएगा और सोमवार को विशेष CBI जज के सामने पेश किया जाएगा। वह CBI के दो मामलों में वांछित है, जिनमें चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) के एक मामले में भी उसके खिलाफ अभियोजन शिकायत दायर है। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक ED देश-विदेश में कई संपत्तियां कुर्क कर चुकी है।
ओमान में कैसे पकड़ा गया
CBI के अनुसार इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर रॉयल ओमान पुलिस ने चंद्राकर का पता लगाकर उसे हिरासत में लिया था। इसके बाद CBI और ED ने सबूतों के साथ ओमान सरकार को औपचारिक प्रत्यर्पण प्रस्ताव भेजे। इंडियन एक्सप्रेस के एक सूत्र के मुताबिक भारतीय एजेंसियां 2023 से उसे तलाश रही थीं और हाल में ED को पता चला कि वह ओमान में है। CBI ने ओमान सरकार और वहां की पुलिस के सहयोग का शुक्रिया अदा किया है।
क्या है महादेव ऐप मामला
छत्तीसगढ़ के दुर्ग ज़िले से आने वाले चंद्राकर को जांच एजेंसियां इस कथित घोटाले का एक सरगना बताती हैं। द हिंदू के मुताबिक कथित घोटाला करीब 6,000 करोड़ रुपये का आंका गया है। CBI ने 2024 में छत्तीसगढ़ सरकार के अनुरोध पर ये मामले अपने हाथ में लिए थे।
कैसे चलता था नेटवर्क
CBI की जांच के मुताबिक यह सिंडिकेट भारत के बाहर से चलाया जा रहा था। क्रिकेट, फुटबॉल, ताश के खेल और दूसरे इवेंट पर अवैध सट्टा लगवाने के लिए देशभर में फ्रेंचाइज़ी जैसे “पैनल” और “ब्रांच” बनाई गई थीं, जो लोगों को जोड़ती थीं और उनसे पैसा जमा करवाती थीं। सट्टे की कमाई बड़ी संख्या में “म्यूल” यानी किराये के बैंक खातों से घुमाई गई और हवाला के ज़रिये विदेश भेजी गई। एजेंसी का आरोप है कि इस पैसे का एक हिस्सा सरकारी कर्मचारियों को “प्रोटेक्शन मनी” के रूप में दिया गया, ताकि धंधा बेरोकटोक चलता रहे।
चार्जशीट भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, आपराधिक साज़िश, धोखाधड़ी और जालसाज़ी से जुड़ी IPC की धाराओं और छत्तीसगढ़ जुआ (प्रतिषेध) अधिनियम के तहत दाखिल की गई है। ये सभी आरोप हैं, जिन पर फैसला अदालत करेगी।
आम लोगों के लिए सबक
ऐसे नेटवर्क आम लोगों के बैंक खाते किराये पर लेकर पैसा घुमाते हैं। कुछ हज़ार रुपये के लालच में अपना खाता, सिम या UPI किसी और को देना आपको भी जांच के घेरे में ला सकता है। दिल्ली समेत कई शहरों में पुलिस म्यूल खातों पर लगातार कार्रवाई कर रही है।
सौरभ चंद्राकर कौन है?
वह महादेव ऑनलाइन बुक अवैध सट्टेबाज़ी सिंडिकेट का प्रमोटर और जांच एजेंसियों के मुताबिक मुख्य आरोपी है, जो छत्तीसगढ़ के दुर्ग ज़िले का रहने वाला है।
उसे भारत कब लाया गया?
CBI की टीम उसे 1 नवंबर 2026 की शाम ओमान से भारत लाई। 2 नवंबर को रायपुर की विशेष CBI अदालत में पेशी तय है।
उस पर कौन-से केस हैं?
CBI के दो केस, जिनमें चार्जशीट दाखिल है, और ED का मनी लॉन्ड्रिंग केस, जिसमें अभियोजन शिकायत दायर है।
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