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  • क्राइम स्टोरी: 2005 दिल्ली सीरियल ब्लास्ट- दिवाली से पहले सरोजिनी नगर, पहाड़गंज, गोविंदपुरी में धमाके; 12 साल बाद क्या फैसला आया

    क्राइम स्टोरी: 2005 दिल्ली सीरियल ब्लास्ट- दिवाली से पहले सरोजिनी नगर, पहाड़गंज, गोविंदपुरी में धमाके; 12 साल बाद क्या फैसला आया

    क्या हुआ: 29 अक्टूबर 2005, दिवाली से दो दिन पहले, दिल्ली के तीन भीड़भाड़ वाले इलाकों में सिलसिलेवार धमाके; 67 मौतें (कई रिपोर्टों के अनुसार), 200 से ज्यादा घायल
    कब: धमाके 29 अक्टूबर 2005 शाम करीब 5:38 से 6:05 बजे; ट्रायल कोर्ट का फैसला 16 फरवरी 2017
    कहां: पहाड़गंज (नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के पास), गोविंदपुरी (DTC बस), सरोजिनी नगर मार्केट
    आपके लिए मतलब: करीब 12 साल चले ट्रायल में दो आरोपी बरी हुए, एक को सिर्फ UAPA की धाराओं में दोषी ठहराया गया; जांच की गुणवत्ता पर सवाल उठे
    क्या करें: त्योहारी भीड़ में लावारिस बैग/वाहन दिखे तो छुएं नहीं, तुरंत 112 पर बताएं; बाजार में इमरजेंसी रास्ते पहचानें

    दिवाली की खरीदारी का वक्त था। 29 अक्टूबर 2005 की शाम दिल्ली के बाजारों में भारी भीड़ थी। तभी आधे घंटे के भीतर तीन जगह धमाके हुए और शहर का सबसे काला त्योहार शुरू हुआ। Hindustan Times, Indian Express और The Economic Times की रिपोर्टों के अनुसार इन धमाकों में 67 लोगों की जान गई और 200 से ज्यादा लोग घायल हुए। The Hindu ने मृतकों की संख्या 80 और घायलों की 225 बताई थी, यानी अलग-अलग स्रोतों में आंकड़ा अलग है। आज 8 नवंबर 2026 को, जब दिल्ली फिर दिवाली मना रही है, यह मामला याद दिलाता है कि त्योहारी भीड़ में सतर्कता क्यों जरूरी है।

    तीन धमाके, आधे घंटे में

    Hindustan Times के मुताबिक पहला धमाका शाम करीब 5:38 बजे नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के पास पहाड़गंज में हुआ। पुलिस ने बाद में बताया कि बम एक केमिस्ट की दुकान के बाहर खड़े दोपहिया वाहन पर रखा गया था।

    दूसरा धमाका दक्षिण दिल्ली के गोविंदपुरी में एक DTC बस में हुआ। यात्रियों ने बाद में बताया कि एक व्यक्ति बैग लेकर बस में चढ़ा, टिकट लेने से मना किया और बैग छोड़कर उतर गया। ड्राइवर और कंडक्टर ने सतर्कता दिखाई, यात्रियों को नीचे उतारा और कंडक्टर ने बैग उठाकर बाहर फेंका। उसी दौरान बैग फट गया। ड्राइवर-कंडक्टर घायल हुए, लेकिन उनकी फुर्ती से कई जानें बचीं।

    तीसरा और सबसे घातक धमाका शाम करीब 6:05 बजे सरोजिनी नगर मार्केट में हुआ। पुलिस के मुताबिक विस्फोटक एक वैन में रखा गया था, जो गैस सिलेंडर इस्तेमाल करने वाले एक विक्रेता के पास खड़ी थी। सबसे ज्यादा मौतें यहीं हुईं।

    जांच और गिरफ्तारियां

    मामले की जांच दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने की। BBC के मुताबिक भारत ने इन हमलों के लिए आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा को जिम्मेदार ठहराया था। Hindustan Times के अनुसार 10 नवंबर 2005 को स्पेशल सेल ने श्रीनगर से तारिक अहमद डार को गिरफ्तार किया, जिसे पुलिस ने साजिश का मुख्य आरोपी बताया। मोहम्मद हुसैन फाजिली और मोहम्मद रफीक शाह को भी आरोपी बनाया गया। चार्जशीट में हत्या, देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने, आपराधिक साजिश और UAPA की धाराएं लगाई गईं। The Hindu के मुताबिक कुल पांच आरोपी थे; इनमें से दो ने आरोप कबूल किए और 2014 में उन्हें सजा हुई। The Economic Times के अनुसार उन पर टेरर फंडिंग का आरोप था और उन्हें जेल में बिताई गई अवधि के आधार पर छोड़ा गया।

    12 साल बाद फैसला

    16 फरवरी 2017 को पटियाला हाउस कोर्ट में एडिशनल सेशंस जज रीतेश सिंह ने 140 पन्नों का फैसला सुनाया। Indian Express के मुताबिक अदालत ने कहा कि अभियोजन फाजिली और शाह के खिलाफ आरोप साबित करने में “बुरी तरह नाकाम” रहा, और दोनों को सभी आरोपों से बरी कर दिया। तारिक अहमद डार को धमाकों की साजिश से जुड़े आरोपों से बरी किया गया, लेकिन आतंकी संगठन का सदस्य होने और उसे समर्थन देने (UAPA धारा 38 और 39) का दोषी माना गया। अदालत ने कहा कि अभियोजन का केस मुख्य रूप से इंटरसेप्ट की गई बातचीत पर टिका था, जिससे डार को साजिश से जोड़ना साबित नहीं हुआ। इन धाराओं में अधिकतम सजा 10 साल है, और डार इससे ज्यादा समय जेल में बिता चुका था। HT के अनुसार एक अलग मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जमानत न होने के कारण वह उस समय बाहर नहीं आ सका।

    सबक: त्योहार की भीड़ में क्या करें

    गोविंदपुरी बस के ड्राइवर-कंडक्टर की सूझबूझ इस मामले का सबसे बड़ा सबक है। भीड़ वाले बाजार, बस या मेट्रो में कोई लावारिस बैग, पैकेट या लंबे समय से खड़ा संदिग्ध वाहन दिखे तो उसे खुद न छुएं, लोगों को दूर करें और तुरंत 112 पर कॉल करें। बाजार जाते समय परिवार के साथ एक मिलने की जगह तय रखें, बच्चों के पास फोन नंबर लिखी पर्ची रखें, और निकलने के रास्ते पहले देख लें। दुकानदार CCTV चालू रखें और पार्किंग में अनजान वाहनों पर नजर रखें। यह केस यह भी बताता है कि मजबूत सबूत और पेशेवर जांच के बिना बड़े मामलों में भी अदालत में दोष साबित करना मुश्किल होता है।

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    स्रोत

    By SunoHub News