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  • इज़राइल चुनाव 27 अक्टूबर: आखिरी सर्वे में किसी को बहुमत नहीं, नेतन्याहू बनाम आइज़नकोट की कांटे की टक्कर

    इज़राइल चुनाव 27 अक्टूबर: आखिरी सर्वे में किसी को बहुमत नहीं, नेतन्याहू बनाम आइज़नकोट की कांटे की टक्कर

    क्या हुआ: इज़राइल में संसद (नेसेट) के आम चुनाव से पहले आखिरी सर्वे आए, किसी भी गुट को बहुमत मिलता नहीं दिख रहा
    कब: मतदान मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026; एग्ज़िट पोल भारतीय समय रात 10 बजे
    कहां: इज़राइल, 120 सीटों वाली नेसेट
    आपके लिए मतलब: इज़राइल भारत का बड़ा रक्षा और तकनीकी साझेदार है; अस्थिर नतीजे पश्चिम एशिया और तेल बाज़ार पर असर डाल सकते हैं
    क्या करें: नतीजों के बाद गठबंधन की तस्वीर साफ होने में दिन या हफ्ते लग सकते हैं, अफवाहों से बचें

    इज़राइल में मंगलवार को वोट डाले जाएंगे और मुकाबला आखिरी हफ्ते तक उलझा हुआ है। 120 सीटों वाली संसद नेसेट में सरकार बनाने के लिए 61 सीटें चाहिए। शुक्रवार को आए आखिरी सर्वे बताते हैं कि न प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू का खेमा और न ही पूर्व सेना प्रमुख गादी आइज़नकोट के नेतृत्व वाला विपक्षी गुट अपने दम पर इस आंकड़े तक पहुंच रहा है।

    दो सर्वे, दो अलग तस्वीरें

    i24NEWS के लिए डायरेक्ट पोल्स के सर्वे में नेतन्याहू के गुट को 59 सीटें मिलीं, यानी बहुमत से सिर्फ दो कम। आइज़नकोट के गुट को 47 और अरब पार्टियों को 14 सीटें दी गईं। इसमें लिकुड 26 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी रही और आइज़नकोट की यशार पार्टी 21 पर।

    सरकारी प्रसारक कान का सर्वे उलटी तस्वीर दिखाता है। उसमें नेतन्याहू खेमा 50 और आइज़नकोट का गुट 52 सीटों पर है। यशार 22 सीटों के साथ लिकुड (20) से आगे है। मारिव अखबार के सर्वे में भी विपक्ष 54 और सत्ता पक्ष 48 पर रहा, और सीधे मुकाबले में आइज़नकोट 49% के साथ नेतन्याहू (41%) से आगे दिखे।

    छोटी पार्टियां तय करेंगी खेल

    चुनाव में 3.25% वोट की न्यूनतम सीमा है। पूर्व जनरल ओफ़र विंटर की पार्टी इसी सीमा के आसपास झूल रही है। वह पार हुई या नहीं, इससे कुछ सीटों का गणित बदल सकता है। पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट की पार्टी को सर्वे में 12 से 15 सीटें मिलती दिख रही हैं।

    बहुमत न मिला तो क्या

    अगर कोई भी गुट 61 तक नहीं पहुंचा तो जोड़-तोड़ लंबी चल सकती है। इज़राइल में पिछले कुछ सालों में ऐसे हालात में बार-बार चुनाव हो चुके हैं, इसलिए नतीजों के बाद भी तस्वीर साफ होने में वक्त लग सकता है।

    भारत के लिए क्यों अहम

    इज़राइल भारत का करीबी रक्षा, कृषि और तकनीकी साझेदार है। पश्चिम एशिया में कोई भी राजनीतिक अस्थिरता कच्चे तेल की कीमतों पर असर डालती है, जो पहले से ऊंचाई पर हैं। इस बारे में हमारी रिपोर्ट ब्रेंट क्रूड $116 पर पढ़ सकते हैं।

    इज़राइल में चुनाव कब है?

    मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को; एग्ज़िट पोल भारतीय समय रात 10 बजे आएगा।

    सरकार बनाने के लिए कितनी सीटें चाहिए?

    120 सीटों वाली नेसेट में 61 सीटें।

    मुख्य मुकाबला किनके बीच है?

    प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू की लिकुड और पूर्व सेना प्रमुख गादी आइज़नकोट की यशार पार्टी के बीच।

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