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  • ब्राज़ील चुनाव नतीजा: पहले राउंड में पिछड़ने के बाद लूला ने पलटी बाज़ी, चौथी बार बने राष्ट्रपति; फ्लावियो बोल्सोनारो ने हार मानने से किया इनकार

    ब्राज़ील चुनाव नतीजा: पहले राउंड में पिछड़ने के बाद लूला ने पलटी बाज़ी, चौथी बार बने राष्ट्रपति; फ्लावियो बोल्सोनारो ने हार मानने से किया इनकार

    क्या हुआ: लुइज़ इनासियो लूला डा सिल्वा ने राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे दौर में फ्लावियो बोल्सोनारो को हराया
    कब: मतदान रविवार, 25 अक्टूबर 2026; नतीजा भारत में सोमवार सुबह
    कहां: ब्राज़ील
    आपके लिए मतलब: BRICS के अहम साथी ब्राज़ील में भारत से अच्छे रिश्ते रखने वाली सरकार बनी रहेगी
    क्या करें: बोल्सोनारो खेमे की कानूनी चुनौती पर नज़र रखें; नतीजे को चुनाव अदालत ने अभी पलटा नहीं है

    तीन हफ्ते पहले जिसे राजनीतिक रूप से खत्म माना जा रहा था, उसी नेता ने ब्राज़ील में इतिहास रच दिया। 80 साल के लूला डा सिल्वा ने रविवार को हुए रनऑफ में दक्षिणपंथी नेता फ्लावियो बोल्सोनारो को हरा दिया और चौथी बार राष्ट्रपति चुने गए।

    वोटों का पूरा हिसाब

    100 फीसदी वोटों की गिनती के बाद लूला को 51.79% वोट मिले, यानी करीब 6.43 करोड़। 45 साल के फ्लावियो बोल्सोनारो को 48.21% यानी करीब 5.98 करोड़ वोट मिले। द गार्डियन के मुताबिक अक्टूबर की शुरुआत में हुए पहले दौर में लूला करीब 22 लाख वोटों से पीछे थे, लेकिन दूसरे दौर में करीब 43 लाख वोटों से जीत गए। 1980 के दशक में लोकतंत्र लौटने के बाद यह पहली बार है जब पहले दौर में दूसरे नंबर पर रहा उम्मीदवार रनऑफ जीता है।

    जीत की बड़ी वजह मतदान बढ़ना मानी जा रही है। पहले दौर में रिकॉर्ड 21.08% लोग वोट डालने नहीं आए थे, जबकि दूसरे दौर में यह आंकड़ा घटकर 19.21% रहा।

    बोल्सोनारो ने नतीजा मानने से इनकार किया

    फ्लावियो बोल्सोनारो ने कहा कि नतीजा स्वीकार करना “असंभव” है और उनकी कानूनी टीम चुनाव रद्द कराने की कोशिश करेगी। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के जज क्रिस्टियानो ज़ानिन के मतदान का समय दो घंटे बढ़ाने के फैसले पर आपत्ति जताई। गार्डियन ने लिखा है कि बोल्सोनारो के अपने कैंपेन ने भी समय बढ़ाने की मांग की थी। उनके पिता, पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो, तख्तापलट की साज़िश के मामले में 27 साल की सज़ा काट रहे हैं।

    साओ पाउलो में समर्थकों को संबोधित करते हुए लूला ने कहा कि यह चुनाव “इनकार की राजनीति की हार” है और यह लोकतंत्र की जीत है। मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम और पराग्वे के राष्ट्रपति सैंटियागो पेन्या समेत कई नेताओं ने लूला को बधाई दी है।

    भारत के लिए क्यों अहम

    ब्राज़ील और भारत दोनों BRICS और G20 के सदस्य हैं। लूला के कार्यकाल में दोनों देशों के बीच व्यापार, कृषि और ऊर्जा पर सहयोग बढ़ा है। इसी हफ्ते दिल्ली में BRICS संसदीय फोरम भी हो रहा है। लूला मंगलवार को 81 साल के हो जाएंगे।

    ब्राज़ील चुनाव 2026 में किसकी जीत हुई?

    लूला डा सिल्वा ने 51.79% वोट के साथ फ्लावियो बोल्सोनारो (48.21%) को हराया।

    लूला कितनी बार राष्ट्रपति बने हैं?

    यह उनका चौथा कार्यकाल होगा। वे 2002, 2006 और 2022 में भी जीते थे।

    क्या बोल्सोनारो ने हार मान ली?

    नहीं। उन्होंने कहा है कि उनकी कानूनी टीम चुनाव रद्द कराने की कोशिश करेगी।

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  • इज़राइल चुनाव 27 अक्टूबर: आखिरी सर्वे में किसी को बहुमत नहीं, नेतन्याहू बनाम आइज़नकोट की कांटे की टक्कर

    इज़राइल चुनाव 27 अक्टूबर: आखिरी सर्वे में किसी को बहुमत नहीं, नेतन्याहू बनाम आइज़नकोट की कांटे की टक्कर

    क्या हुआ: इज़राइल में संसद (नेसेट) के आम चुनाव से पहले आखिरी सर्वे आए, किसी भी गुट को बहुमत मिलता नहीं दिख रहा
    कब: मतदान मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026; एग्ज़िट पोल भारतीय समय रात 10 बजे
    कहां: इज़राइल, 120 सीटों वाली नेसेट
    आपके लिए मतलब: इज़राइल भारत का बड़ा रक्षा और तकनीकी साझेदार है; अस्थिर नतीजे पश्चिम एशिया और तेल बाज़ार पर असर डाल सकते हैं
    क्या करें: नतीजों के बाद गठबंधन की तस्वीर साफ होने में दिन या हफ्ते लग सकते हैं, अफवाहों से बचें

    इज़राइल में मंगलवार को वोट डाले जाएंगे और मुकाबला आखिरी हफ्ते तक उलझा हुआ है। 120 सीटों वाली संसद नेसेट में सरकार बनाने के लिए 61 सीटें चाहिए। शुक्रवार को आए आखिरी सर्वे बताते हैं कि न प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू का खेमा और न ही पूर्व सेना प्रमुख गादी आइज़नकोट के नेतृत्व वाला विपक्षी गुट अपने दम पर इस आंकड़े तक पहुंच रहा है।

    दो सर्वे, दो अलग तस्वीरें

    i24NEWS के लिए डायरेक्ट पोल्स के सर्वे में नेतन्याहू के गुट को 59 सीटें मिलीं, यानी बहुमत से सिर्फ दो कम। आइज़नकोट के गुट को 47 और अरब पार्टियों को 14 सीटें दी गईं। इसमें लिकुड 26 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी रही और आइज़नकोट की यशार पार्टी 21 पर।

    सरकारी प्रसारक कान का सर्वे उलटी तस्वीर दिखाता है। उसमें नेतन्याहू खेमा 50 और आइज़नकोट का गुट 52 सीटों पर है। यशार 22 सीटों के साथ लिकुड (20) से आगे है। मारिव अखबार के सर्वे में भी विपक्ष 54 और सत्ता पक्ष 48 पर रहा, और सीधे मुकाबले में आइज़नकोट 49% के साथ नेतन्याहू (41%) से आगे दिखे।

    छोटी पार्टियां तय करेंगी खेल

    चुनाव में 3.25% वोट की न्यूनतम सीमा है। पूर्व जनरल ओफ़र विंटर की पार्टी इसी सीमा के आसपास झूल रही है। वह पार हुई या नहीं, इससे कुछ सीटों का गणित बदल सकता है। पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट की पार्टी को सर्वे में 12 से 15 सीटें मिलती दिख रही हैं।

    बहुमत न मिला तो क्या

    अगर कोई भी गुट 61 तक नहीं पहुंचा तो जोड़-तोड़ लंबी चल सकती है। इज़राइल में पिछले कुछ सालों में ऐसे हालात में बार-बार चुनाव हो चुके हैं, इसलिए नतीजों के बाद भी तस्वीर साफ होने में वक्त लग सकता है।

    भारत के लिए क्यों अहम

    इज़राइल भारत का करीबी रक्षा, कृषि और तकनीकी साझेदार है। पश्चिम एशिया में कोई भी राजनीतिक अस्थिरता कच्चे तेल की कीमतों पर असर डालती है, जो पहले से ऊंचाई पर हैं। इस बारे में हमारी रिपोर्ट ब्रेंट क्रूड $116 पर पढ़ सकते हैं।

    इज़राइल में चुनाव कब है?

    मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को; एग्ज़िट पोल भारतीय समय रात 10 बजे आएगा।

    सरकार बनाने के लिए कितनी सीटें चाहिए?

    120 सीटों वाली नेसेट में 61 सीटें।

    मुख्य मुकाबला किनके बीच है?

    प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू की लिकुड और पूर्व सेना प्रमुख गादी आइज़नकोट की यशार पार्टी के बीच।

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