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  • SC: दो-बच्चे मानदंड ने प्रासंगिकता खोई; पंचायत अयोग्यता वाला 2003 फैसला बड़ी बेंच पर, TFR 1.9

    SC: दो-बच्चे मानदंड ने प्रासंगिकता खोई; पंचायत अयोग्यता वाला 2003 फैसला बड़ी बेंच पर, TFR 1.9

    क्या हुआ: सुप्रीम कोर्ट ने दो-बच्चे मानदंड वाली स्थानीय निकाय अयोग्यता के 2003 फैसले को बड़ी बेंच को भेजा; कहा—अधिक जनसंख्या का डर कमजोर पड़ चुका है
    कब: बुधवार, 4 नवंबर 2026 (रिपोर्टिंग 5 नवंबर तक)
    कहां: भारत; याचिका महाराष्ट्र की पूर्व सरपंच मंगला भीमराव इंगले से जुड़ी
    आपके लिए मतलब: पंचायत/स्थानीय चुनाव नियमों पर बड़े संवैधानिक असर की संभावना; फिलहाल बड़ी बेंच तय करेगी
    क्या करें: अफवाह न फैलाएं—अभी पुराना नियम अपने-आप रद्द नहीं; अंतिम फैसला बड़ी बेंच का इंतजार

    दो से अधिक बच्चों वाले उम्मीदवारों को पंचायत चुनाव से बाहर रखने वाले कानूनों पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। Indian Express, India Today और LiveLaw के अनुसार जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आरधे की बेंच ने कहा कि दो से अधिक बच्चों पर दंड लगाने वाले कानून अपनी प्रासंगिकता खो चुके हैं—क्योंकि अति-जनसंख्या का डर पिछले दशकों के जनसांख्यिकी बदलाव से कमजोर पड़ गया है। बेंच ने 2003 के जावेद बनाम हरियाणा फैसले पर पुनर्विचार के लिए मामला बड़ी बेंच को भेज दिया।

    प्रजनन दर 3 से 1.9

    कोर्ट ने नोट किया कि 2003 में जब दो-बच्चे मानदंड को संवैधानिक ठहराया गया था, भारत की कुल प्रजनन दर करीब 3 थी; अब यह लगभग 1.9 है—जबकि रिप्लेसमेंट लेवल 2.1 माना जाता है। अदालत ने चेताया कि प्रजनन दर रिप्लेसमेंट से नीचे रहने पर आगे बुजुर्ग आबादी का हिस्सा बढ़ेगा और कामकाजी आबादी का अनुपात घटेगा।

    याचिका महाराष्ट्र के काकोड़ा ग्राम पंचायत की पूर्व सरपंच मंगला भीमराव इंगले की है, जिन्हें महाराष्ट्र ग्राम पंचायत अधिनियम की धारा के तहत तीसरे बच्चे के आधार पर अयोग्य ठहराया गया था। बॉम्बे हाईकोर्ट ने अगस्त 2025 में अयोग्यता बरकरार रखी थी। SC ने कहा कि ऐसे कानून नागरिकों के एक पूरे वर्ग को राजनीतिक प्रतिनिधित्व से बाहर करते हैं और बच्चे पैदा करने व लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेने के बीच जबरदस्ती चुनाव थोपते हैं—जिसका असर अनुच्छेद 21 के तहत प्रजनन स्वायत्तता से जुड़ता है।

    कितने राज्यों में लागू

    एमिकस संकलन के अनुसार सात राज्यों ने प्रावधान हटा लिया है, 15 में ऐसा प्रतिबंध नहीं; असम, गोवा, गुजरात, महाराष्ट्र, ओडिशा और उत्तराखंड समेत कुछ राज्य अभी भी दो-बच्चे मानदंड रखते हैं। यह कानूनी विकास है—अंतिम नतीजा बड़ी बेंच के फैसले पर निर्भर करेगा।

    SC ने क्या कहा?

    दो-बच्चे दंड कानून प्रासंगिकता खो चुके; 2003 जावेद फैसला बड़ी बेंच पर।

    प्रजनन दर का क्या आंकड़ा?

    कोर्ट के अनुसार ~3 (2003) से गिरकर ~1.9; रिप्लेसमेंट 2.1।

    याचिका किसकी है?

    महाराष्ट्र की पूर्व सरपंच मंगला भीमराव इंगले—तीसरे बच्चे पर अयोग्यता को चुनौती।

    क्या नियम तुरंत खत्म?

    नहीं—बड़ी बेंच पुनर्विचार करेगी; फिलहाल अंतिम शब्द बाकी।

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    स्रोत

    By SunoHub News