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    कालिंदी कुंज में यमुना पर फिर जहरीले झाग की परत, छठ से पहले DJB की डिफोमिंग तैयारी

    कहाँ: कालिंदी कुंज, ओखला बैराज के पास यमुना (दक्षिण-पूर्वी दिल्ली)
    कब: शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 की सुबह
    क्या हुआ: नदी की सतह पर सफेद जहरीले झाग की मोटी परत दिखी; सरकारी अधिकारी के मुताबिक कुछ देर बाद नदी साफ दिखी
    आपके लिए क्या मतलब: छठ (नवंबर मध्य) से पहले यमुना के पानी की हालत फिर चिंता का विषय है
    क्या करें: झाग वाले पानी में नहाने या उसे छूने से बचें, त्वचा पर जलन हो तो साफ पानी से धोएँ और डॉक्टर को दिखाएँ

    सर्दी की आहट के साथ यमुना पर फिर वही पुरानी तस्वीर लौट आई है। शुक्रवार सुबह कालिंदी कुंज के पास नदी की सतह पर बर्फ जैसी दिखने वाली सफेद झाग की परत तैरती दिखी। समाचार एजेंसी ANI ने सुबह का वीडियो साझा किया, जबकि PTI से बात करते हुए एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि झाग सुबह कुछ समय के लिए दिखा और बाद में नदी साफ हो गई।

    https://x.com/ANI/status/2113480866366398905

    झाग क्यों बनता है

    विशेषज्ञों और दिल्ली जल बोर्ड (DJB) के मुताबिक यह झाग साबुन जैसे रसायनों यानी सर्फेक्टेंट से बनता है। ये रसायन बिना ट्रीटमेंट वाले घरेलू सीवेज, फैक्ट्रियों के गंदे पानी और धोबी घाटों से नदी में पहुँचते हैं। सड़ती जलकुंभी, पत्तियाँ और घास जैसी जैविक चीज़ें भी इसमें भूमिका निभाती हैं। ओखला बैराज पर पानी ऊँचाई से गिरता है तो उसमें मंथन होता है और झाग उठता है। तापमान गिरने पर ये बुलबुले ज़्यादा देर टिके रहते हैं, इसलिए अक्टूबर से दिसंबर के बीच यह समस्या सबसे ज़्यादा दिखती है।

    दिल्ली सरकार के कहने पर TERI ने पिछले साल जो अध्ययन किया था, उसमें शहर के कई सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) और कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) के ठीक से काम न करने को भी वजह बताया गया था।

    छठ से पहले DJB की डिफोमिंग तैयारी

    DJB हर सर्दी कालिंदी कुंज पर झाग कम करने के लिए डिफोमर नाम के रसायन का छिड़काव करता है। एक DJB अधिकारी ने PTI को बताया कि यह अभियान 2022 से चल रहा है, इस साल भी कंपनियों के लिए टेंडर निकाला गया है और पिछले साल का बचा हुआ स्टॉक रखने के लिए दो कैंप बनाए गए हैं। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार पिछले सीज़न में अक्टूबर से दिसंबर 2025 के बीच 63 दिनों में करीब 48,000 किलो डिफोमिंग रसायन इस्तेमाल हुआ था।

    हालाँकि यमुना पर काम करने वाले कार्यकर्ता, जैसे SANDRP से जुड़े भीम सिंह रावत, कहते हैं कि छिड़काव सिर्फ़ दिखने वाले लक्षण को दबाता है; असली समस्या नदी में लगातार गिर रहा गंदा पानी है।

    राजनीति भी तेज़

    आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने डिफोमर खरीद के टेंडर में गड़बड़ी का आरोप लगाया है। यह एक राजनीतिक आरोप है, जिसकी किसी जाँच में पुष्टि नहीं हुई है। झाग की यह तस्वीर ऐसे समय आई है जब एक दिन पहले ही यमुना सफाई से जुड़ी ₹8,941 करोड़ की 43 परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास हुआ था।

    छठ व्रतियों और घाट जाने वालों के लिए

    • झाग वाले हिस्से में डुबकी लगाने से बचें; प्रशासन की ओर से तैयार किए गए घाटों का ही इस्तेमाल करें।
    • बच्चों को पानी से दूर रखें, पूजा के बाद हाथ-पैर साफ पानी से धोएँ।
    • त्वचा पर खुजली, आँखों में जलन हो तो नज़दीकी डिस्पेंसरी में दिखाएँ।

    हवा की हालत भी इन दिनों ठीक नहीं है—GRAP-1 के तहत चल रही सख्ती के बारे में भी पढ़ें। पूर्वी दिल्ली में 8 नवंबर तक पानी सप्लाई पर असर की खबर भी देखें।

    कालिंदी कुंज में यमुना पर झाग कब दिखा?

    23 अक्टूबर 2026, शुक्रवार की सुबह कालिंदी कुंज के पास यमुना पर सफेद झाग की परत दिखी।

    यमुना में झाग क्यों बनता है?

    सीवेज, औद्योगिक कचरे और डिटर्जेंट में मौजूद सर्फेक्टेंट और सड़ती जलकुंभी के कारण; ओखला बैराज पर पानी गिरने से झाग उठता है और ठंड में ज़्यादा टिकता है।

    क्या झाग हटाने के लिए कुछ किया जा रहा है?

    DJB 2022 से कालिंदी कुंज पर डिफोमर का छिड़काव करता है और इस साल भी छठ से पहले इसकी तैयारी है।

    स्रोत