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सीलमपुर की झुग्गियों की जगह बनेंगे ऊंचे फ्लैट: नई नीति में 17 बस्तियों के पुनर्विकास की प्रक्रिया शुरू

सुनोहब डेस्क

झुग्गी बस्ती के पीछे बनती ऊंची रिहायशी इमारतें, AI से बनी प्रतीकात्मक तस्वीर

क्या हुआ: दिल्ली सरकार ने नई झुग्गी पुनर्वास नीति के तहत सीलमपुर, सुल्तानपुरी और लाजपत नगर की 17 झुग्गी बस्तियों को उसी जगह ऊंची इमारतों में बसाने की प्रक्रिया शुरू की है
कब: हिंदुस्तान टाइम्स की 4 नवंबर 2026 की रिपोर्ट; फिज़िबिलिटी स्टडी करीब चार महीने में पूरी होने की उम्मीद
कहां: न्यू सीलमपुर (ब्रह्मपुरी रोड, G-ब्लॉक गुरुद्वारा पार्क, CPJ-ब्लॉक, पुश्ता EIJ ब्लॉक), सुल्तानपुरी-मंगोलपुरी और लाजपत नगर-जल विहार
आपके लिए मतलब: सीलमपुर की चार बस्तियों के 1,243 परिवारों को आगे चलकर उसी इलाके में पक्के फ्लैट मिल सकते हैं; अभी सिर्फ शुरुआती अध्ययन का चरण है
क्या करें: अपने दस्तावेज़ (आधार, राशन कार्ड, बिजली बिल, पुराने सर्वे की पर्ची) संभालकर रखें; फ्लैट दिलाने के नाम पर पैसे मांगने वालों से सावधान रहें और जानकारी सिर्फ DUSIB से लें

न्यू सीलमपुर की ब्रह्मपुरी रोड वाली झुग्गी बस्ती में रहने वाले सैकड़ों परिवारों के लिए यह खबर बड़ी है। दिल्ली सरकार ने अपनी नई झुग्गी पुनर्वास नीति के तहत शहर की 17 बस्तियों को उसी जगह ऊंची रिहायशी इमारतों में बदलने का काम शुरू कर दिया है, और इनमें सबसे बड़ी बस्ती सीलमपुर की ही है।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक ये 17 बस्तियां तीन इलाकों में हैं: सीलमपुर, सुल्तानपुरी और लाजपत नगर। इनमें कुल 4,870 झुग्गियां हैं। सरकार की योजना इन तीनों जगह एक-एक हाई-राइज़ कॉलोनी बनाने की है।

सीलमपुर की चार बस्तियां, 1,243 झुग्गियां

सीलमपुर इलाके में चार बस्तियां चुनी गई हैं, जिनमें 1,243 झुग्गियां आती हैं। ये हैं न्यू सीलमपुर का G-ब्लॉक गुरुद्वारा पार्क, CPJ-ब्लॉक, पुश्ता EIJ ब्लॉक और 3/4K ब्रह्मपुरी रोड। रिपोर्ट के मुताबिक ब्रह्मपुरी रोड वाली बस्ती 24,900 वर्ग मीटर में फैली है और इसमें 305 झुग्गियां हैं। EIG पुश्ता में 14,500 वर्ग मीटर पर 418 झुग्गियां हैं।

सुल्तानपुरी में नौ बस्तियों की 1,997 झुग्गियां और लाजपत नगर इलाके में चार बस्तियों की 1,630 झुग्गियां इस योजना में शामिल हैं। लाजपत नगर की जल विहार बस्ती में अकेले 526 झुग्गियां हैं।

नई नीति में क्या बदला

दिल्ली स्लम एंड जेजे पुनर्वास और पुनर्स्थापन नीति 2026 पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर है। इसमें निजी बिल्डर झुग्गीवासियों के लिए फ्लैट बनाएंगे और बदले में उन्हें उसी ज़मीन के कमर्शियल रूप से कीमती हिस्से पर निर्माण का अधिकार मिलेगा। 2015 की नीति में यह काम मुख्य रूप से सरकार खुद करती थी। सरकार का तर्क है कि मिक्स्ड-यूज़ डेवलपमेंट से प्रोजेक्ट आर्थिक रूप से चल पाएंगे।

अभी कौन-सा चरण है

पहले कदम के तौर पर दिल्ली अर्बन शेल्टर इम्प्रूवमेंट बोर्ड (DUSIB) एक निजी एजेंसी से तीनों जगह की फिज़िबिलिटी स्टडी करवाएगा। यह एजेंसी हर साइट के लिए इमारतों का शुरुआती नक्शा, लागत, कुल ज़मीन, FAR, फ्लैटों और मंज़िलों की संख्या, पार्किंग और दूसरी सुविधाओं का खाका तैयार करेगी। एक सरकारी अधिकारी के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया है कि डेवलपर चुनने के लिए ट्रांज़ैक्शन एडवाइज़र नियुक्त करने को बोलियां मंगाई गई हैं। स्टडी करीब चार महीने में पूरी होने की उम्मीद है।

यानी फिलहाल किसी को घर खाली करने को नहीं कहा गया है और फ्लैट बनने में अभी लंबा वक्त है। सीलमपुर जैसे घनी आबादी वाले इलाके में, जहां बरसात में पानी भरना और तंग गलियां पुरानी परेशानी हैं, लोग यह देखना चाहेंगे कि पात्रता कैसे तय होगी और निर्माण के दौरान परिवार कहां रहेंगे। इन सवालों पर सरकार की ओर से आगे विस्तार से जानकारी आनी बाकी है।

सीलमपुर की कौन-सी बस्तियां इस योजना में हैं?

न्यू सीलमपुर का G-ब्लॉक गुरुद्वारा पार्क, CPJ-ब्लॉक, पुश्ता EIJ ब्लॉक और 3/4K ब्रह्मपुरी रोड, जिनमें कुल 1,243 झुग्गियां हैं।

क्या लोगों को अभी घर खाली करना होगा?

नहीं, अभी सिर्फ फिज़िबिलिटी स्टडी का चरण है जो करीब चार महीने चलेगा।

फ्लैट कौन बनाएगा?

नई नीति में PPP मॉडल है, यानी निजी डेवलपर फ्लैट बनाएंगे और बदले में ज़मीन के एक हिस्से पर व्यावसायिक निर्माण का अधिकार पाएंगे।

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स्रोत

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