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तेहरान में ईरान-सऊदी-पाकिस्तान-तुर्की की पहली बैठक: क्षेत्रीय सुरक्षा पर बातचीत जारी रखने पर सहमति, होर्मुज़ भी एजेंडे में

सुनोहब डेस्क

खाली राजनयिक सम्मेलन कक्ष में गोल मेज़, कुर्सियां, माइक्रोफोन और बिना निशान वाले झंडों के स्टैंड (AI से बनी प्रतीकात्मक तस्वीर)

क्या हुआ: ईरान, सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों ने तेहरान में पहली संयुक्त बैठक की और क्षेत्रीय शांति व सुरक्षा पर बातचीत जारी रखने पर सहमति जताई
कब: सोमवार, 26 अक्टूबर 2026; संयुक्त बयान देर रात आया
कहां: तेहरान, ईरान
आपके लिए मतलब: खाड़ी में तनाव घटे तो कच्चे तेल और होर्मुज़ के समुद्री रास्ते पर दबाव कम हो सकता है, जिसका असर भारत में पेट्रोल-डीज़ल और LPG की कीमतों पर पड़ता है
क्या करें: खाड़ी देशों में रहने वाले परिजन वहां के भारतीय दूतावास की एडवाइज़री पर नज़र रखें; अफवाहों से बचें

महीनों के युद्ध और हमलों के बीच पश्चिम एशिया से बातचीत की एक नई खबर आई है। तेहरान में ईरान ने सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के प्रतिनिधियों की मेज़बानी की। ये तीनों देश अगस्त में ‘मक्का संयुक्त रक्षा समझौते’ पर दस्तखत कर चुके हैं। ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक यह चारों देशों की पहली संयुक्त बैठक थी।

बैठक में कौन-कौन शामिल हुआ

बैठक की मेज़बानी ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसिन रज़ाई ने की। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान और विदेश मंत्री अब्बास अराघची भी मौजूद रहे। सऊदी अरब से रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान, पाकिस्तान से सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और तुर्की से खुफिया एजेंसी प्रमुख इब्राहिम कालिन पहुंचे। डॉन के मुताबिक पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नक़वी भी बैठक में दिखे।

संयुक्त बयान में क्या कहा गया

ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार चारों देशों ने “क्षेत्र में शांति और सुरक्षा समेत आपसी सहयोग मज़बूत करने के लिए बातचीत जारी रखने” पर सहमति दी। तुर्की की सरकारी एजेंसी अनादोलु ने बताया कि बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा, इज़राइल की गतिविधियों और फ़िलिस्तीन व लेबनान के हालात पर चर्चा हुई।

पेज़ेश्कियान ने इस्लामी देशों से “एकजुट होकर एक जैसा रुख अपनाने” की अपील की। रज़ाई ने ईरानी टीवी से कहा कि बातचीत “बहुत अच्छी” रही और उन्हें क्षेत्र में “नया माहौल” बनता महसूस हो रहा है।

सऊदी और पाकिस्तान का मकसद

अल जज़ीरा के मुताबिक सऊदी अरब ने कहा कि यह दौरा “सैन्य तनाव की वापसी रोकने” के लिए बातचीत के रास्ते खोलने के मकसद से था। बैठक ऐसे समय हुई जब सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने यमन के हूती विद्रोहियों की ओर से दागी गई मिसाइलों और ड्रोन को फिर से मार गिराने का दावा किया।

रॉयटर्स ने एक वरिष्ठ पाकिस्तानी सुरक्षा अधिकारी के हवाले से बताया कि बातचीत क्षेत्रीय ‘नॉन-एग्रेशन नेटवर्क’ बनाने पर केंद्रित थी। एजेंडे में अमेरिका-ईरान वार्ता, सऊदी अरब पर हूती हमले, होर्मुज़ जलडमरूमध्य और ईरानी बंदरगाहों की अमेरिकी नाकेबंदी भी शामिल थी। हालांकि ईरान पहले ही कह चुका है कि अमेरिका की मांगें पूरी होने तक परमाणु मुद्दे पर बात नहीं होगी, इसलिए किसी बड़े समझौते की राह अभी तंग है।

भारत के लिए क्यों अहम

भारत अपनी ज़रूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल और LPG खाड़ी से मंगाता है और इसका बड़ा हिस्सा होर्मुज़ के रास्ते आता है। लाखों भारतीय सऊदी अरब और खाड़ी देशों में काम करते हैं। ऐसे में इस इलाके में तनाव कम करने की कोई भी ठोस पहल भारत के लिए राहत की बात होगी। अगली बैठक कब और कहां होगी, इसका ऐलान अभी नहीं हुआ है।

तेहरान बैठक में कौन से देश शामिल थे?

ईरान, सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की।

बैठक का नतीजा क्या रहा?

चारों देशों ने क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा पर सहयोग के लिए बातचीत जारी रखने पर सहमति दी।

मक्का रक्षा समझौता क्या है?

सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के बीच अगस्त में हुआ आपसी रक्षा समझौता, जिसमें एक सदस्य पर हमला सब पर हमला माना जाता है।

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स्रोत

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