कहाँ: C-DAC मुंबई और बैंक ऑफ इंडिया; MeitY के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में
कब: करार 22 अक्टूबर 2026 को हुआ; PIB ने 23 अक्टूबर को जानकारी दी
क्या हुआ: दोनों संस्थाएँ क्वांटम-सुरक्षित बैंकिंग, AI, ब्लॉकचेन और साइबर सुरक्षा पर साझा रिसर्च, पायलट और ट्रेनिंग करेंगी
आपके लिए क्या मतलब: लंबे समय में बैंकिंग लेन-देन की सुरक्षा मज़बूत करने की कोशिश; ग्राहकों के लिए अभी कोई बदलाव नहीं
क्या करें: फिलहाल कुछ नहीं; OTP, PIN और पासवर्ड किसी से साझा न करने जैसी सामान्य सावधानियाँ जारी रखें
आने वाले वर्षों में क्वांटम कंप्यूटर आज के कई एन्क्रिप्शन तरीकों के लिए चुनौती बन सकते हैं—और बैंकिंग इसकी सबसे संवेदनशील कड़ी है। इसी तैयारी में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) की स्वायत्त संस्था सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (C-DAC) और सरकारी बैंक, बैंक ऑफ इंडिया (BOI) ने एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर दस्तखत किए हैं। पत्र सूचना कार्यालय (PIB) ने शुक्रवार को इसकी जानकारी दी।
करार में क्या है
PIB के मुताबिक इस करार का मुख्य फोकस “वित्तीय नवाचार के लिए क्वांटम इकोसिस्टम” बनाना है। दोनों संस्थाएँ ‘क्वांटम-इंस्पायर्ड’ और ‘क्वांटम-सेफ’ तकनीकों पर काम करेंगी, ताकि बैंकिंग सिस्टम की सुरक्षा, भरोसा और फैसले लेने की क्षमता मज़बूत हो।
- बैंकिंग के प्राथमिक उपयोगों की सूची बनाना और सुरक्षित सैंडबॉक्स में प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट दिखाना
- नई तकनीकों की तुलना मौजूदा सिस्टम से करना और आगे के पायलट का रोडमैप बनाना
- AI, ब्लॉकचेन, डिजिटल पहचान, सुरक्षित डेटा शेयरिंग, स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट और धोखाधड़ी विश्लेषण पर काम
- क्वांटम कंप्यूटिंग, क्वांटम सुरक्षा और AI में कर्मचारियों की ट्रेनिंग
किसने क्या कहा
MeitY सचिव एस. कृष्णन ने साइबर खतरों के बढ़ते दौर में “क्वांटम-रेज़िलिएंट” वित्तीय इकोसिस्टम बनाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। C-DAC के महानिदेशक ई. मगेश ने इसे देसी क्वांटम क्षमता को बैंकिंग के व्यावहारिक समाधानों में बदलने की दिशा में अहम कदम बताया। BOI के कार्यकारी निदेशक राजीव मिश्रा ने कहा कि बैंक इन संभावनाओं को “व्यवस्थित तरीके से” परखेगा। करार का आदान-प्रदान C-DAC मुंबई के कार्यकारी निदेशक आदित्य कुमार सिन्हा और BOI के CGM-IT व CIO सत्येंद्र सिंह ने किया।
आम ग्राहक के लिए
यह एक रिसर्च और पायलट स्तर का करार है; इससे आपके खाते, ऐप या लेन-देन में फिलहाल कोई बदलाव नहीं होगा। इसकी कोई समय-सीमा या बजट भी घोषित नहीं हुआ है। फिर भी, यह संकेत है कि भारतीय बैंक भविष्य के साइबर खतरों के लिए अभी से तैयारी शुरू कर रहे हैं।
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C-DAC और बैंक ऑफ इंडिया का करार किस बारे में है?
बैंकिंग के लिए क्वांटम-सुरक्षित तकनीक, AI, ब्लॉकचेन और साइबर सुरक्षा पर साझा रिसर्च, पायलट और ट्रेनिंग के बारे में।
यह करार कब हुआ?
22 अक्टूबर 2026 को; PIB ने 23 अक्टूबर को जानकारी दी।
क्या इससे ग्राहकों के लिए कुछ बदलेगा?
फिलहाल नहीं। यह रिसर्च और प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट स्तर का करार है।





